राजनीति
गुरुग्राम: महीनों से वेतन न मिलने पर स्वास्थ्यकर्मियों का फूटा गुस्सा, अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 04:08 am

गुरुग्राम में वेतन भुगतान न होने से नाराज स्वास्थ्यकर्मियों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिससे जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट गहरा गया है।
गुरुग्राम में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले स्वास्थ्यकर्मियों ने एक बार फिर प्रशासन और सरकार के खिलाफ विरोध का बिगुल फूंक दिया है। पिछले कई महीनों से लंबित वेतन के भुगतान की मांग को लेकर बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मचारी धरने पर बैठ गए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद उनके बैंक खातों में अभी तक पगार नहीं पहुंची है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे कोरोना काल से लेकर अब तक पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन जब उनके वाजिब हक यानी वेतन की बात आती है, तो प्रशासन बजट की कमी का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेता है। इस धरने के कारण अस्पतालों के ओपीडी और अन्य महत्वपूर्ण विभागों के कामकाज पर असर पड़ने की संभावना है। कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द ही उनके वेतन का भुगतान नहीं किया गया, तो वे काम पूरी तरह बंद कर देंगे, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह से शासन-प्रशासन की होगी।
ICN24 के माध्यम से यह जानना महत्वपूर्ण है कि गुरुग्राम जैसे हाई-टेक और विकसित शहर में स्वास्थ्यकर्मियों की यह दुर्दशा चिंताजनक है। यहाँ काम करने वाले कई कर्मचारी ऐसे हैं जो अपने परिवारों के इकलौते कमाऊ सदस्य हैं। बच्चों की स्कूल फीस, घर का किराया और दैनिक खर्चों के लिए उन्हें कर्ज लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है। धरने पर बैठे एक कर्मचारी ने भावुक होते हुए कहा, "हम दूसरों का इलाज करते हैं, लेकिन आज हमारा अपना जीवन और परिवार बीमार हो रहा है।"
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर प्रासंगिक है, क्योंकि वहां बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र (जैसे नर्सिंग और देखभाल) में कार्यरत हैं। ऑस्ट्रेलिया में जहां श्रम कानूनों और वेतन भुगतान को लेकर सख्त नियम हैं, वहीं भारत के प्रमुख औद्योगिक शहरों में इस तरह की देरी प्रशासनिक खामियों को उजागर करती है। कई एनआरआई परिवारों के सदस्य भारत में इन सेवाओं से जुड़े हैं, और ऐसी खबरें उनके लिए चिंता का विषय बनती हैं।
फिलहाल, प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर उन्हें जल्द भुगतान का भरोसा दिलाया है, लेकिन कर्मचारी अब ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों का तर्क है कि 'आश्वासन से पेट नहीं भरता'। यदि सरकार ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह विरोध प्रदर्शन राज्य स्तर पर भी फैल सकता है, जिससे हरियाणा की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।
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