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गुजरात रक्षा सम्मेलन: रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा, 'आत्मनिर्भरता' पर जोर

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 12:43 pm
गुजरात रक्षा सम्मेलन: रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा, 'आत्मनिर्भरता' पर जोर

गुजरात सरकार ने रक्षा क्षेत्र में नवाचार और एमएसएमई (MSMEs) को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष सम्मेलन का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य भारत को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है।

गुजरात सरकार ने रक्षा क्षेत्र में नवाचार, स्टार्टअप्स और उभरती प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण सम्मेलन का आयोजन किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को राष्ट्रीय रक्षा आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में सक्रिय रूप से एकीकृत करना है। यह कदम भारत सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के अनुरूप है, जो रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में विदेशी निर्भरता को कम करने पर केंद्रित है। गांधीनगर में आयोजित इस सम्मेलन में रक्षा विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और उद्यमियों ने हिस्सा लिया। चर्चा का मुख्य केंद्र बिंदु यह था कि कैसे स्थानीय स्टार्टअप्स और छोटे उद्योगों को अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि गुजरात अपनी औद्योगिक क्षमता और बुनियादी ढांचे के कारण रक्षा विनिर्माण का एक प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है। सम्मेलन के दौरान 'आत्मनिर्भरता' के महत्व पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक युद्ध कौशल अब केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा और ड्रोन तकनीक जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। भारतीय स्टार्टअप्स इन क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं और उन्हें सरकारी समर्थन से वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय और वहां के उद्यमियों के लिए भी यह एक बड़ा अवसर हो सकता है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते रक्षा और रणनीतिक संबंधों के मद्देनजर, विदेशी भारतीय (NRIs) और ऑस्ट्रेलियाई-भारतीय कंपनियां भारत के इस बढ़ते रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में निवेश और तकनीकी हस्तांतरण के माध्यम से भागीदारी कर सकती हैं। दोनों देशों के बीच साझा सुरक्षा हितों ने सहयोग के नए द्वार खोले हैं। अंत में, यह सम्मेलन केवल एक चर्चा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें एमएसएमई को वित्तीय सहायता, अनुसंधान एवं विकास (R&D) में छूट और बाजार तक पहुंच प्रदान करने के रोडमैप पर भी विचार किया गया। गुजरात की यह पहल न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देगी, बल्कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता को भी सुदृढ़ करेगी। आने वाले समय में, यह उम्मीद की जा रही है कि ऐसे सम्मेलनों के माध्यम से भारतीय रक्षा स्टार्टअप्स वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक अभिन्न अंग बनेंगे।
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