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नागपुर: इंजीनियरिंग का 'अजूबा' कहे जाने वाले डबल-डेकर फ्लाईओवर गड्ढों में तब्दील, सुरक्षा पर उठे सवाल

ICN24 Newsroom 14 अग॰ 2026, 05:37 am
नागपुर: इंजीनियरिंग का 'अजूबा' कहे जाने वाले डबल-डेकर फ्लाईओवर गड्ढों में तब्दील, सुरक्षा पर उठे सवाल

नागपुर के गौरव कहे जाने वाले वर्धा रोड और कामठी रोड के डबल-डेकर फ्लाईओवर वर्तमान में गड्ढों की मार झेल रहे हैं, जिससे बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

नागपुर, जिसे महाराष्ट्र की उप-राजधानी और तेजी से विकसित होते बुनियादी ढांचे के केंद्र के रूप में देखा जाता है, वर्तमान में अपनी सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में से एक की बदहाली को लेकर चर्चा में है। शहर के वर्धा रोड और कामठी रोड पर स्थित 'डबल-डेकर' फ्लाईओवर, जिन्हें कभी इंजीनियरिंग के चमत्कार के रूप में प्रचारित किया गया था, अब गड्ढों और जर्जर सतह के कारण यात्रियों के लिए खतरा बन गए हैं। इन फ्लाईओवरों का निर्माण नागपुर के बुनियादी ढांचे में एक बड़ी छलांग के रूप में प्रस्तुत किया गया था। इनका उद्देश्य न केवल यातायात की भीड़ को कम करना था, बल्कि यह आधुनिक भारत की प्रगति के प्रतीक भी थे। हालांकि, मानसून की बारिश और भारी यातायात के दबाव ने इन दावों की पोल खोल दी है। स्थानीय निवासियों और नियमित यात्रियों का कहना है कि सड़क की ऊपरी सतह कई जगहों से उखड़ गई है, जिससे दोपहिया और चार पहिया वाहनों के लिए दुर्घटना का जोखिम बढ़ गया है। विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए, जो अक्सर छुट्टियों के दौरान या व्यापारिक कारणों से नागपुर और विदर्भ क्षेत्र की यात्रा करते हैं, बुनियादी ढांचे की यह गिरावट चिंता का विषय है। कई प्रवासी भारतीय (NRIs) नागपुर को निवेश के लिए एक सुरक्षित और आधुनिक शहर मानते रहे हैं, लेकिन प्रमुख सड़कों की ऐसी स्थिति निवेश और विकास की धारणा को प्रभावित करती है। नागपुर मेट्रो और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित इन फ्लाईओवरों को वैश्विक मानकों के अनुरूप बताया गया था। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि क्या निर्माण के दौरान गुणवत्ता नियंत्रण के साथ कोई समझौता किया गया था। जानकारों का कहना है कि ड्रेनेज सिस्टम की कमी और घटिया निर्माण सामग्री के कारण पानी सड़क की निचली परतों में रिस रहा है, जिससे डामर उखड़ रहा है। वर्तमान में, स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों द्वारा पैचवर्क या अस्थायी मरम्मत की जा रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक अल्पकालिक समाधान है। जब तक जल निकासी की व्यवस्था और सड़क की बनावट में सुधार नहीं किया जाता, तब तक यह समस्या हर मानसून में बनी रहेगी। यात्रियों ने सोशल मीडिया पर इन 'इंजीनियरिंग अजूबों' की तस्वीरें साझा कर प्रशासन के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया है, जिसमें मांग की गई है कि भविष्य की परियोजनाओं में जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।
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