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डॉक्टरों से मारपीट का मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने शिवसेना पार्षद की जमानत पर लगाई रोक, सरेंडर करने का आदेश

ICN24 Newsroom 19 जुल॰ 2026, 12:34 am
डॉक्टरों से मारपीट का मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने शिवसेना पार्षद की जमानत पर लगाई रोक, सरेंडर करने का आदेश

बॉम्बे हाईकोर्ट ने डॉक्टरों के साथ मारपीट के आरोपी शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे की जमानत पर रोक लगा दी है और उन्हें 19 जुलाई तक पुलिस के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया है।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में डॉक्टरों के साथ मारपीट के मामले में आरोपी शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे को दी गई जमानत पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए म्हात्रे को निर्देश दिया है कि वे आगामी 19 जुलाई तक संबंधित अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करें। यह मामला चिकित्सा पेशेवरों की सुरक्षा और सार्वजनिक प्रतिनिधियों के आचरण को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ चुका है। यह घटना तब सामने आई थी जब म्हात्रे और उनके समर्थकों पर एक अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों के साथ अभद्र व्यवहार और शारीरिक हमला करने का आरोप लगा था। निचली अदालत द्वारा पूर्व में म्हात्रे को राहत दी गई थी, जिसे अब उच्च न्यायालय ने पलट दिया है। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि एक सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा कानून को हाथ में लेना न केवल निंदनीय है, बल्कि इससे समाज में गलत संदेश जाता है। न्यायमूर्ति ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ हिंसा के मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती। न्यायालय के अनुसार, चिकित्सा कर्मचारियों को भयमुक्त वातावरण में काम करने का अधिकार है, विशेषकर तब जब वे सार्वजनिक सेवा में लगे हों। म्हात्रे की ओर से पेश वकीलों ने राहत की अपील की थी, लेकिन अदालत ने प्राथमिक सबूतों और गवाहों के बयानों को देखते हुए जमानत के आदेश पर रोक लगाना उचित समझा। भारतीय मूल के डॉक्टरों का समुदाय, जो वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में कार्यरत है, भारत में अपने सहयोगियों के साथ होने वाली ऐसी घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करता रहा है। सिडनी और मेलबर्न में सक्रिय कई भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई चिकित्सा संघों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका मानना है कि भारत में डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए कड़े कानूनी प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है। यह फैसला उन लोगों के लिए एक चेतावनी है जो राजनीतिक प्रभाव का उपयोग कर कानून से बचने की कोशिश करते हैं। अगले सप्ताह रमेश म्हात्रे के सरेंडर करने की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। इस मामले ने महाराष्ट्र की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि शिवसेना के स्थानीय नेतृत्व को अब अपने जनप्रतिनिधि के आचरण पर जवाब देना पड़ रहा है। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि क्या पुलिस इस मामले में आगे की जांच के लिए म्हात्रे की रिमांड की मांग करती है।
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