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हरिद्वार: गुरुद्वारों में श्रद्धा के साथ मनाई गई सावन संक्रांति, भाई तारु सिंह की शहादत को किया नमन
ICN24 Newsroom 18 जुल॰ 2026, 10:34 pm

हरिद्वार के विभिन्न गुरुद्वारों में सावन संक्रांति के अवसर पर विशेष अरदास और कीर्तन का आयोजन किया गया, जहाँ श्रद्धालुओं ने शहीद भाई तारु सिंह के बलिदान को याद किया।
धर्मनगरी हरिद्वार में सावन के महीने की शुरुआत के साथ ही आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार देखने को मिल रहा है। सावन संक्रांति के पावन अवसर पर शहर के प्रमुख गुरुद्वारों में विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय संगत और तीर्थयात्रियों ने भाग लिया। इस अवसर पर गुरुद्वारों को विशेष रूप से सजाया गया था और सुबह से ही गुरुबाणी के कीर्तन से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में आयोजित मुख्य समागम में रागी जत्थों ने 'बारह माहा' के पाठ के माध्यम से सावन महीने के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। गुरु ग्रंथ साहिब में दर्ज गुरु अर्जुन देव जी की वाणी के अनुसार, सावन का महीना परमात्मा से मिलन और विरह की भावनाओं का प्रतीक है। उपस्थित विद्वानों ने संगत को बताया कि कैसे प्रकृति के इस बदलाव के साथ मनुष्य को अपने भीतर भक्ति और शांति का संचार करना चाहिए।
इस वर्ष सावन संक्रांति का महत्व इसलिए भी बढ़ गया क्योंकि यह महान सिख शहीद भाई तारु सिंह जी के शहीदी दिवस के साथ मेल खाता है। कथावाचकों ने भाई तारु सिंह के जीवन और उनके अटूट विश्वास की गाथा सुनाई। इतिहास गवाह है कि 18वीं शताब्दी में मुगल शासन के दौरान भाई तारु सिंह ने धर्म परिवर्तन करने के बजाय अपनी खोपड़ी उतरवाना स्वीकार किया था, लेकिन अपने केश और विश्वास का त्याग नहीं किया। उनके इस बलिदान को याद करते हुए संगत ने मानवता और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा का संकल्प लिया।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय-सिख समुदाय के लिए भी यह दिन विशेष महत्व रखता है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में स्थित गुरुद्वारों में भी इसी तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जो प्रवासी भारतीयों को उनकी जड़ों और इतिहास से जोड़े रखता है। सामुदायिक नेताओं का मानना है कि इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध विरासत और बलिदानों के बारे में जागरूक करने का सबसे सशक्त माध्यम हैं।
कार्यक्रम के अंत में विश्व शांति और सर्वत्र के भले के लिए अरदास की गई। इसके पश्चात गुरु का अटूट लंगर वितरित किया गया, जिसमें सभी वर्गों के लोगों ने सेवा भाव के साथ शिरकत की। गुरुद्वारा प्रबंधन समिति ने इस अवसर पर सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए कहा कि महापुरुषों की शहादत हमें प्रेम और सेवा का मार्ग दिखाती है। इस दौरान स्थानीय प्रशासन ने भी सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के कड़े प्रबंध किए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
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