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'छड़ी मुबारक' श्रीनगर के दशनामी अखाड़े से अमरनाथ गुफा के लिए रवाना; तीर्थयात्रा के अंतिम चरण की शुरुआत
ICN24 Newsroom 29 जुल॰ 2026, 04:36 pm

भगवान शिव की पवित्र 'छड़ी मुबारक' श्रीनगर के दशनामी अखाड़े से अमरनाथ गुफा के लिए अपनी अंतिम यात्रा पर निकल चुकी है।
श्रीनगर के ऐतिहासिक दशनामी अखाड़ा मंदिर से भगवान शिव की पवित्र गदा, जिसे 'छड़ी मुबारक' के नाम से जाना जाता है, अपनी अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण यात्रा के लिए अमरनाथ गुफा की ओर रवाना हो गई है। यह आयोजन वार्षिक अमरनाथ यात्रा के अंतिम चरण का प्रतीक है, जो श्रावण पूर्णिमा के दिन गुफा में विशेष पूजा-अर्चना के साथ समाप्त होता है।
महंत दीपेंद्र गिरी के नेतृत्व में इस पवित्र गदा को श्रीनगर से दक्षिण कश्मीर के हिमालयी क्षेत्र में स्थित पवित्र गुफा तक ले जाया जा रहा है। यात्रा की शुरुआत से पहले दशनामी अखाड़े में विशेष अनुष्ठान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा की गई। इस दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु और साधु-संत उपस्थित रहे, जिन्होंने भगवान शिव के जयघोष से वातावरण को भक्तिमय कर दिया।
प्रशासन द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, छड़ी मुबारक विभिन्न पारंपरिक पड़ावों से होकर गुजरेगी। इसमें पहलगाम, चंदनवाड़ी, शेषनाग और पंचतरणी शामिल हैं। प्रत्येक पड़ाव पर स्थानीय लोगों और यात्रियों द्वारा इसका भव्य स्वागत किया जाता है। महंत दीपेंद्र गिरी ने इस अवसर पर कहा कि यह यात्रा विश्व शांति और मानवता के कल्याण के लिए आयोजित की जाती है। उन्होंने यात्रा की सफलता और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रार्थना की।
सुरक्षा के लिहाज से, जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने इस मार्ग पर कड़े इंतजाम किए हैं। श्रीनगर से लेकर पवित्र गुफा तक सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है ताकि यात्रा निर्बाध रूप से संपन्न हो सके। अमरनाथ यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह कश्मीर की गंगा-जमुनी तहजीब की भी परिचायक है, जहां स्थानीय मुस्लिम समुदाय भी तीर्थयात्रियों की सेवा में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेषकर शिव भक्तों और कश्मीरी प्रवासियों के लिए इस खबर का विशेष महत्व है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले कई श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा के फुटेज और समाचारों को बड़े चाव से देखते हैं। ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न मंदिरों में भी इस दौरान विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की जाती हैं, जो प्रवासी भारतीयों के अपनी जड़ों और संस्कृति से गहरे जुड़ाव को दर्शाती हैं।
यह पवित्र गदा 19 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन) के अवसर पर अमरनाथ गुफा पहुंचेगी, जहां मुख्य पूजा के बाद इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा का औपचारिक समापन होगा। इस वर्ष की यात्रा में अब तक लाखों श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए हैं, जो आस्था के प्रति उनके अटूट विश्वास को दर्शाता है।
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