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धान की जगह गेंदा: छत्तीसगढ़ के किसानों ने चुना मुनाफे का नया रास्ता
ICN24 Newsroom 7 जुल॰ 2026, 09:31 am
छत्तीसगढ़ के रायपुर में किसानों ने पारंपरिक धान की खेती छोड़ अब गेंदे के फूलों का रुख किया है, जिससे उनकी आय में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों में कृषि की पारंपरिक तस्वीर तेजी से बदल रही है। जिस क्षेत्र को कभी 'धान का कटोरा' कहा जाता था, वहां के किसान अब अपनी उपजाऊ भूमि पर धान के बजाय रंग-बिरंगे गेंदा फूलों की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह बदलाव किसी विवशता का परिणाम नहीं, बल्कि किसानों की सोची-समझी आर्थिक रणनीति का हिस्सा है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, धान की फसल में मेहनत और लागत के मुकाबले मुनाफा सीमित रहता है, जबकि गेंदे की खेती एक 'नगदी फसल' (Cash Crop) के रूप में उभरकर सामने आई है। रायपुर के स्थानीय बाजारों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों में भी गेंदे के फूलों की जबरदस्त मांग रहती है। विशेष रूप से त्योहारों के सीजन, शादियों और धार्मिक आयोजनों के दौरान इन फूलों की कीमतें आसमान छूने लगती हैं, जिसका सीधा फायदा अब किसानों की जेब तक पहुंच रहा है।
इस बदलाव का एक मुख्य कारण कम समय में अधिक पैदावार होना भी है। धान की फसल साल में एक या दो बार ही ली जा सकती है, लेकिन गेंदे की खेती से किसान साल में तीन से चार बार उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, गेंदे के पौधों को धान के मुकाबले कम पानी की आवश्यकता होती है, जो गिरते भूजल स्तर को देखते हुए एक पर्यावरण अनुकूल विकल्प भी साबित हो रहा है।
रायपुर के एक प्रगतिशील किसान ने बताया कि गेंदे की खेती ने उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूती दी है। उन्होंने कहा, "धान में हमें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता था और बाजार की अनिश्चितता बनी रहती थी। अब हम हर दो-तीन महीने में फसल काटते हैं और नकदी हाथ में होती है।" सरकार की ओर से भी बागवानी (Horticulture) को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सब्सिडी और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिससे युवा किसान भी इस क्षेत्र की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया में दिवाली, गणेश चतुर्थी और बड़े सांस्कृतिक आयोजनों के दौरान फूलों की भारी मांग होती है। भारत में फूलों की खेती के बढ़ते रकबे से भविष्य में निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। हालांकि ऑस्ट्रेलिया अपनी जैव-सुरक्षा (Biosecurity) नीतियों के कारण ताजे फूलों के आयात पर कड़े प्रतिबंध रखता है, लेकिन फूलों से बने सूखे उत्पादों और अर्क (Extracts) के अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की इस 'फ्लोरीकल्चर क्रांति' का सकारात्मक असर देखने को मिलेगा।
कुल मिलाकर, रायपुर के खेतों से उठने वाली यह गेंदे की महक केवल सुंदरता का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में आ रही आर्थिक समृद्धि और कृषि विविधीकरण की एक नई इबारत लिख रही है।
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