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क्या अखिलेश यादव छोड़ेंगे सपा अध्यक्ष का पद? यूपी मंत्री राजभर का दावा- कई नेता भाजपा के संपर्क में
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 03:25 pm
उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया है कि अखिलेश यादव सपा अध्यक्ष पद छोड़ सकते हैं और पार्टी में बड़ी फूट की संभावना है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर एक बड़े संकट की भविष्यवाणी की है। राजभर का दावा है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव जल्द ही अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं और पार्टी की कमान अपने चाचा शिवपाल सिंह यादव को सौंप सकते हैं।
राजभर ने लखनऊ में मीडिया से बात करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के कई वरिष्ठ विधायक और नेता लगातार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व के संपर्क में हैं। राजभर के अनुसार, पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष अखिलेश यादव को कमान छोड़ने पर मजबूर कर सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर शिवपाल यादव को आगे नहीं बढ़ाया गया, तो पार्टी में एक बड़ी टूट अपरिहार्य है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजभर का यह बयान आगामी चुनावों से पहले विपक्षी खेमे में भ्रम पैदा करने की रणनीति हो सकता है। हालांकि, शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के बीच के ऐतिहासिक मतभेदों को देखते हुए, इस तरह की अटकलों को पूरी तरह से नकारा भी नहीं जा सकता। राजभर ने केवल सांगठनिक बदलाव की बात नहीं की, बल्कि उन्होंने सपा नेताओं के धार्मिक रुख पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने विशेष रूप से अयोध्या में राम मंदिर के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के स्टैंड की आलोचना की और इसे जनविरोधी बताया।
राजभर ने अखिलेश और शिवपाल यादव को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वे उनके खिलाफ चुनाव लड़कर दिखाएं। उन्होंने दावा किया कि जनता अब सपा की ‘परिवारवादी’ राजनीति से ऊब चुकी है और भाजपा-एनडीए गठबंधन के विकास कार्यों पर भरोसा कर रही है। राजभर का यह हमला ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और विभिन्न दल अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेषकर उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के लिए, राज्य की यह राजनीतिक अस्थिरता चर्चा का विषय बनी हुई है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में सक्रिय ‘यूपी डायस्पोरा’ समूहों में इस बात को लेकर बहस तेज है कि क्या समाजवादी पार्टी अपना अस्तित्व बचा पाएगी या भाजपा का दबदबा और बढ़ेगा। उत्तर प्रदेश की राजनीति का सीधा असर भारत की राष्ट्रीय राजनीति पर पड़ता है, इसलिए वैश्विक स्तर पर भारतीय समुदाय इन घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखता है।
फिलहाल, समाजवादी पार्टी की ओर से राजभर के इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, सपा के कुछ प्रवक्ताओं ने इसे राजभर की 'पब्लिसिटी स्टंट' करार दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राजभर की यह भविष्यवाणी सच साबित होती है या यह महज चुनावी मौसम की एक और बयानबाजी बनकर रह जाती है।
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