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आगरा में प्रशासनिक लापरवाही: बिना किसी सूचना के गुपचुप तरीके से लगा 'मोहल्ला समाधान शिविर', पार्षदों ने उठाए सवाल

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 08:53 am
आगरा में प्रशासनिक लापरवाही: बिना किसी सूचना के गुपचुप तरीके से लगा 'मोहल्ला समाधान शिविर', पार्षदों ने उठाए सवाल

आगरा नगर निगम द्वारा आयोजित मोहल्ला समाधान शिविर विवादों में घिर गया है। जनता और पार्षदों को बिना जानकारी दिए शिविर लगाने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के आगरा में प्रशासनिक पारदर्शिता और जन-भागीदारी को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। आगरा नगर निगम द्वारा शहर के विभिन्न वार्डों में जनता की समस्याओं के निस्तारण के लिए 'मोहल्ला समाधान शिविर' आयोजित किए जा रहे हैं। हालांकि, हाल ही में वार्ड संख्या 48 में आयोजित एक ऐसे ही शिविर ने तब सुर्खियां बटोरीं, जब यह बात सामने आई कि न तो स्थानीय जनता को और न ही क्षेत्र के पार्षदों को इस कार्यक्रम की कोई जानकारी दी गई थी। इस मामले ने स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही की कमी को उजागर कर दिया है। नियमानुसार, किसी भी जन-सुनवाई या समाधान शिविर का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचना और उनकी समस्याओं—जैसे कि जलभराव, सफाई, गृह कर (House Tax) और सीवर की समस्याओं—का मौके पर समाधान करना होता है। लेकिन आगरा के इस मामले में, शिविर को इतनी गोपनीयता के साथ आयोजित किया गया कि वहां फरियादियों की संख्या न के बराबर रही। क्षेत्रीय पार्षदों का आरोप है कि नगर निगम के अधिकारी केवल कागजी खानापूर्ति करने में जुटे हैं। पार्षदों का कहना है कि यदि उन्हें समय पर सूचित किया गया होता, तो वे अपने क्षेत्र की जनता को जागरूक कर सकते थे ताकि लोग अपनी समस्याओं को लेकर शिविर में पहुंच सकें। बिना जन-प्रतिनिधियों और आम जनता के, ऐसे शिविरों का आयोजन सरकारी संसाधनों और समय की बर्बादी के अलावा कुछ नहीं है। यह घटना केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश सरकार के उस विजन के भी विपरीत है जिसमें 'सरकार आपके द्वार' के तहत पारदर्शिता और जन-संवाद पर जोर दिया जाता है। आगरा के स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर काफी रोष है कि जिस विभाग को उनकी समस्याओं को सुलझाने की जिम्मेदारी दी गई है, वही विभाग उनसे दूरी बनाए हुए है। भारत में स्थानीय निकायों के कामकाज में इस तरह की विसंगतियां अक्सर देखी जाती हैं, लेकिन ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह तुलनात्मक अध्ययन का विषय है। ऑस्ट्रेलिया में लोकल काउंसिल किसी भी छोटे से बदलाव या बैठक के लिए निवासियों को हफ्तों पहले डिजिटल और प्रिंट माध्यमों से सूचित करती हैं। आगरा की यह घटना दिखाती है कि भारतीय नगर निकायों को अभी भी 'कम्युनिटी एंगेजमेंट' (सामुदायिक जुड़ाव) के क्षेत्र में लंबा सफर तय करना बाकी है। फिलहाल, इस मामले पर नगर निगम के उच्च अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है। हालांकि, पार्षदों ने इस मुद्दे को आगामी सदन की बैठक में उठाने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने की चेतावनी दी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रशासन भविष्य में इन शिविरों के आयोजन में सुधार करता है या फिर यह केवल एक 'औपचारिकता' बनकर रह जाएगा।
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