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ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पर चला बुलडोजर, अवैध निर्माण के आरोपों पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

ICN24 Newsroom 19 जुल॰ 2026, 01:34 am
ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पर चला बुलडोजर, अवैध निर्माण के आरोपों पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

पश्चिम बंगाल में प्रशासन ने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के कार्यालय को अवैध बताते हुए ढहा दिया। दो नोटिस के बाद भी जवाब न मिलने पर यह कार्रवाई की गई।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर घमासान शुरू हो गया है। हालिया घटनाक्रम में, उत्तर 24 परगना जिले के भाटपारा इलाके में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी से जुड़े एक कार्यालय को स्थानीय प्रशासन ने ढहा दिया है। प्रशासन का दावा है कि यह ढांचा अवैध रूप से सरकारी भूमि पर बनाया गया था और इसके निर्माण में अनिवार्य नियमों की अनदेखी की गई थी। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई से पहले संबंधित पक्षों को दो बार आधिकारिक नोटिस जारी किए गए थे। इन नोटिसों के माध्यम से कार्यालय के दस्तावेजों और निर्माण की अनुमति से जुड़े साक्ष्य मांगे गए थे। हालांकि, निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई संतोषजनक जवाब न मिलने और वैध दस्तावेज प्रस्तुत न किए जाने के बाद, प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की। शनिवार सुबह भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर ने इस निर्माण को जमींदोज कर दिया। अभिषेक बनर्जी, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे हैं, पश्चिम बंगाल की राजनीति में अत्यंत प्रभावशाली व्यक्ति माने जाते हैं। उनके कार्यालय पर हुई इस कार्रवाई ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। स्थानीय टीएमसी नेताओं ने इस कदम को 'राजनीतिक प्रतिशोध' करार दिया है। पार्टी समर्थकों का आरोप है कि प्रशासन विपक्षी दबाव में आकर चुनिंदा तरीके से कार्रवाई कर रहा है। वहीं, दूसरी ओर विपक्षी दलों, विशेषकर भाजपा ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए इसे कानून की जीत बताया है। विपक्ष का कहना है कि राज्य में सत्ता के संरक्षण में हुए अवैध निर्माणों पर अब लगाम लगनी चाहिए। भारत में 'बुलडोजर कार्रवाई' पिछले कुछ वर्षों में एक विवादास्पद लेकिन चर्चित प्रशासनिक उपकरण बन गई है। उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ यह चलन अब देश के अन्य राज्यों में भी देखने को मिल रहा है, जहां अवैध संपत्तियों और अतिक्रमण के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के रूप में इसे देखा जाता है। हालांकि, मानवाधिकार कार्यकर्ता और कानूनी विशेषज्ञ अक्सर इस पर सवाल उठाते रहे हैं कि क्या यह उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करता है या नहीं। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेषकर बंगाली प्रवासियों के लिए पश्चिम बंगाल की हर छोटी-बड़ी राजनीतिक घटना मायने रखती है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीय सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों के जरिए राज्य की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता पर नजर रखते हैं। इस तरह की कार्रवाइयां अक्सर प्रवासी समुदायों के बीच चर्चा का विषय बनती हैं, क्योंकि वे अपने गृह राज्य में सुशासन और पारदर्शिता की उम्मीद करते हैं। फिलहाल, इस विध्वंस के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह केवल कानून प्रवर्तन का हिस्सा है और किसी भी अवैध ढांचे को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा हो। टीएमसी नेतृत्व ने इस मामले को कानूनी रूप से चुनौती देने के संकेत दिए हैं, जिससे आने वाले दिनों में यह मामला अदालत तक पहुंच सकता है।
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