ऑस्ट्रेलिया
न्यू साउथ वेल्स के एक छोटे से कस्बे में क्यों दिलचस्पी ले रहा है अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन?
ICN24 Newsroom 11 अग॰ 2026, 07:38 pm
NSW का छोटा सा कस्बा फिफ़ील्ड अपनी दुर्लभ खनिज संपदा 'स्कैंडियम' के कारण अब अमेरिकी रक्षा रणनीति का केंद्र बन गया है।
न्यू साउथ वेल्स के मध्य-पश्चिम में स्थित एक छोटा सा कस्बा, फिफ़ील्ड, इन दिनों वैश्विक भू-राजनीति और सामरिक चर्चाओं के केंद्र में है। सिडनी से लगभग छह घंटे की दूरी पर और पार्क्स (Parkes) के पास स्थित इस कस्बे की आबादी पिछले जनगणना के अनुसार मात्र 130 के आसपास थी। लेकिन अब, दुनिया की सबसे शक्तिशाली सैन्य संस्था, अमेरिका का रक्षा मंत्रालय 'पेंटागन', इस सुदूर इलाके में गहरी दिलचस्पी दिखा रहा है। इस अचानक बढ़ी रुचि के पीछे मुख्य कारण है एक दुर्लभ खनिज—स्कैंडियम (Scandium)।
स्कैंडियम को ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त राज्य अमेरिका दोनों ही देशों में एक 'महत्वपूर्ण खनिज' (critical mineral) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। यह खनिज एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। जब स्कैंडियम को एल्युमीनियम के साथ मिलाया जाता है, तो यह एक ऐसा मिश्र धातु (alloy) बनाता है जो वजन में हल्का, लेकिन अविश्वसनीय रूप से मजबूत और गर्मी के प्रति प्रतिरोधी होता है। यही कारण है कि अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमानों, उपग्रहों और उन्नत सैन्य उपकरणों के निर्माण के लिए स्कैंडियम एक अनिवार्य घटक बन गया है।
पेंटागन की इस पहल को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। वर्तमान में, दुनिया के अधिकांश दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति पर चीन का वर्चस्व है। रणनीतिक रूप से, अमेरिका और उसके सहयोगी देश अब चीन पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं और ऑस्ट्रेलिया जैसे भरोसेमंद सहयोगियों से इन खनिजों का स्रोत प्राप्त करना चाहते हैं। फिफ़ील्ड के पास स्थित 'सनराइज प्रोजेक्ट' (Sunrise Project) को दुनिया के सबसे बड़े और सबसे उच्च श्रेणी के स्कैंडियम भंडार में से एक माना जाता है, जो इसे अमेरिका के लिए एक आकर्षक निवेश बनाता है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर विशेष महत्व रखती है। हाल के वर्षों में, बड़ी संख्या में भारतीय मूल के पेशेवर और इंजीनियर ऑस्ट्रेलिया के क्षेत्रीय इलाकों (Regional Australia) में बस रहे हैं और माइनिंग व इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में अपना योगदान दे रहे हैं। फिफ़ील्ड जैसे छोटे शहरों में हो रहे इस तरह के बड़े निवेश से न केवल रोजगार के अवसर पैदा होंगे, बल्कि मध्य-पश्चिम NSW के बुनियादी ढांचे में भी सुधार होगा। इसके अलावा, भारत स्वयं भी 'क्वाड' (Quad) समूह का हिस्सा होने के नाते क्रिटिकल मिनरल्स की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है। ऑस्ट्रेलिया के इस खनिज क्षेत्र में विकास से भारत-ऑस्ट्रेलिया-अमेरिका के बीच त्रिपक्षीय रणनीतिक संबंधों को भी मजबूती मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फिफ़ील्ड की कहानी इस बात का उदाहरण है कि कैसे एक छोटा सा और शांत इलाका वैश्विक सुरक्षा और उच्च तकनीक के भविष्य के लिए निर्णायक बन सकता है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर इस विकास के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों पर भी चर्चा जारी है। फिलहाल, पेंटागन की रुचि ने इस छोटे से ऑस्ट्रेलियाई कस्बे को दुनिया के नक्शे पर एक नई और महत्वपूर्ण पहचान दिला दी है। आने वाले वर्षों में, फिफ़ील्ड न केवल ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था बल्कि वैश्विक रक्षा रणनीति में भी एक अहम भूमिका निभाता नजर आएगा।
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