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ऑस्ट्रेलियाई अस्पतालों में बेड का संकट: मरीज ने राजनेताओं पर 'राजनीतिक खेल' खेलने का लगाया आरोप

ICN24 Newsroom 11 अग॰ 2026, 07:37 pm
ऑस्ट्रेलियाई अस्पतालों में बेड का संकट: मरीज ने राजनेताओं पर 'राजनीतिक खेल' खेलने का लगाया आरोप

ऑस्ट्रेलिया में अस्पतालों में बेड की कमी और इलाज में देरी को लेकर एक मरीज ने राजनेताओं पर तीखा हमला बोला है, जिससे स्वास्थ्य प्रणाली की विफलता उजागर हुई है।

ऑस्ट्रेलिया की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में गहराते संकट के बीच एक मरीज ने कड़ा रुख अपनाते हुए राजनेताओं पर "राजनीतिक खेल" खेलने का आरोप लगाया है। बेड की कमी और इलाज में होने वाली लंबी देरी से तंग आकर मरीज ने कहा कि राजनेता जनता की सेहत से ज्यादा अपनी राजनीति और फंड की खींचतान को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह तीखी प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब ऑस्ट्रेलिया के लगभग सभी राज्यों में अस्पतालों के बाहर एंबुलेंस की कतारें (Ambulance Ramping) और बेड की अनुपलब्धता एक गंभीर राष्ट्रीय मुद्दा बन चुकी है। अपनी आपबीती साझा करते हुए मरीज ने बताया कि बेड न मिलने के कारण उन्हें आपातकालीन विभाग (ER) में घंटों इंतजार करना पड़ा। उन्होंने तर्क दिया कि जब राज्य और संघीय सरकारें स्वास्थ्य बजट के बंटवारे और मेडिकेयर (Medicare) सुधारों पर बहस करती हैं, तो उसका सीधा खामियाजा आम जनता को अपनी सेहत और गरिमा के साथ भुगतना पड़ता है। मरीज के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के बजाय केवल दोषारोपण की राजनीति हो रही है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के लोग न केवल इस स्वास्थ्य प्रणाली के उपभोक्ता हैं, बल्कि एक बड़ी संख्या में इस क्षेत्र में डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के रूप में भी कार्यरत हैं। भारतीय समुदाय के परिवारों में अक्सर बुजुर्ग माता-पिता साथ रहते हैं, जो अपनी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए सार्वजनिक अस्पतालों पर निर्भर होते हैं। आपातकालीन स्थिति में जब इन बुजुर्गों को समय पर बेड नहीं मिलता, तो पूरे परिवार के लिए यह स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो जाती है। इसके साथ ही, अस्पतालों में काम करने वाले भारतीय मूल के स्वास्थ्य कर्मी भी स्टाफ की कमी और संसाधनों के अभाव के कारण भारी मानसिक दबाव (burnout) झेल रहे हैं। अस्पतालों में इस समय "बेड ब्लॉकिंग" (Bed Blocking) एक बड़ी समस्या बनी हुई है। इसका अर्थ है कि कई मरीज चिकित्सकीय रूप से ठीक होने के बावजूद अस्पताल से डिस्चार्ज नहीं किए जा सकते, क्योंकि उनके लिए 'एज्ड केयर' (Aged Care) या एनडीआईएस (NDIS) के तहत उपयुक्त सहायता उपलब्ध नहीं है। इसके कारण नए आने वाले मरीजों के लिए अस्पताल में जगह नहीं बचती। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक प्रणालीगत विफलता है जिसे केवल राजनीति से हल नहीं किया जा सकता। राज्य सरकारों का दावा है कि संघीय सरकार को सार्वजनिक अस्पतालों के लिए 50:50 के अनुपात में फंड देना चाहिए, जबकि वर्तमान में यह बोझ राज्यों पर अधिक है। दूसरी ओर, संघीय सरकार प्रबंधन में कमियों की ओर इशारा करती है। इसी राजनीतिक खींचतान को मरीज ने जनता के जीवन के साथ खिलवाड़ बताया है। जैसे-जैसे सर्दी का मौसम आ रहा है, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव और बढ़ने की आशंका है। भारतीय प्रवासियों, विशेषकर जो 'पैरेंट वीजा' पर यहां आए हैं, उनके लिए इस संकट के बीच इलाज पाना और भी कठिन होता जा रहा है। सामुदायिक नेताओं का कहना है कि अब समय आ गया है कि स्वास्थ्य व्यवस्था को राजनीति से ऊपर रखा जाए ताकि हर नागरिक को समय पर इलाज की गारंटी मिल सके।
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