लाइव
राजनीति
राजनीति

'झारखंड क्यों नहीं गईं?' संसद परिसर में बीजेपी सांसदों ने प्रियंका गांधी को घेरा, तीखी बहस

ICN24 Newsroom 12 अग॰ 2026, 05:37 pm
'झारखंड क्यों नहीं गईं?' संसद परिसर में बीजेपी सांसदों ने प्रियंका गांधी को घेरा, तीखी बहस

संसद के मानसून सत्र के दौरान बीजेपी सांसदों ने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा को झारखंड के मुद्दों पर घेरते हुए तीखे सवाल पूछे।

नई दिल्ली में संसद के मानसून सत्र के दौरान राजनीतिक गहमागहमी अपने चरम पर पहुंच गई है। हाल ही में संसद परिसर के भीतर एक दिलचस्प और तीखा वाकया सामने आया, जब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसदों ने कांग्रेस की नवनिर्वाचित सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा को घेर लिया। बीजेपी सांसदों ने विशेष रूप से प्रियंका गांधी से सवाल किया कि आखिर वे झारखंड की घटनाओं पर चुप क्यों हैं और वहां का दौरा क्यों नहीं किया। घटना उस समय हुई जब संसद परिसर में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहा था। एक तरफ एनडीए के सांसद विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' (INDIA) के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे, तो दूसरी तरफ कांग्रेस और उसके सहयोगी दल सरकार को घेरने की कोशिश में थे। इसी शोर-शराबे के बीच, संबित पात्रा सहित बीजेपी के कई प्रमुख सांसदों ने प्रियंका गांधी को सामने देख उनसे सीधे सवाल दागने शुरू कर दिए। बीजेपी सांसदों ने बार-बार पूछा, "प्रियंका जी, आप वायनाड गईं, आप उत्तर प्रदेश के हाथरस गईं, लेकिन आप झारखंड की बेटियों के साथ हो रहे अन्याय पर चुप क्यों हैं? आप झारखंड क्यों नहीं गईं?" इस अचानक हुए घेराव पर प्रियंका गांधी ने बेहद संयम से जवाब दिया। उन्होंने मुस्कुराते हुए और शांत लहजे में कहा कि वे हर उस स्थान पर जाने के लिए तैयार हैं जहां न्याय की जरूरत है। हालांकि, बीजेपी सांसदों का हमला जारी रहा। वे झारखंड में हाल के दिनों में महिलाओं के खिलाफ हुई आपराधिक घटनाओं और कथित तौर पर कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति का हवाला दे रहे थे। बीजेपी का तर्क है कि कांग्रेस और गांधी परिवार केवल उन्हीं राज्यों में सक्रिय होता है जहां बीजेपी की सरकार है, जबकि अपनी सहयोगी सरकारों (जैसे झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ गठबंधन) वाले राज्यों में हो रहे अपराधों पर आंखें मूंद लेता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह भिड़ंत आगामी विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में काफी महत्वपूर्ण है। झारखंड में जल्द ही चुनाव होने वाले हैं, और बीजेपी राज्य की हेमंत सोरेन सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती। प्रियंका गांधी, जो अब संसद का हिस्सा हैं, बीजेपी के लिए एक प्रमुख निशाना बनी हुई हैं। बीजेपी की रणनीति स्पष्ट रूप से उन्हें 'चयनात्मक संवेदनशीलता' (selective sensitivity) के मुद्दे पर घेरने की है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भारत की संसदीय कार्यवाही और इस तरह की राजनीतिक झड़पें हमेशा से चर्चा का विषय रहती हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे प्रवासी भारतीय अक्सर भारतीय राजनीति के इन घटनाक्रमों पर सोशल मीडिया और सामुदायिक मंचों पर अपनी राय साझा करते हैं। इस तरह के आमने-सामने के मुकाबले यह दर्शाते हैं कि भारतीय राजनीति कितनी अधिक ध्रुवीकृत हो गई है, जिसका प्रभाव विदेशों में रहने वाले भारतीयों की राजनीतिक चर्चाओं पर भी पड़ता है। फिलहाल, संसद के भीतर और बाहर यह खींचतान जारी रहने की उम्मीद है। जहां कांग्रेस प्रियंका गांधी के बचाव में खड़ी है और इसे बीजेपी की हताशा बता रही है, वहीं बीजेपी इसे जनता की आवाज और जवाबदेही की मांग करार दे रही है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि प्रियंका गांधी की संसद में मौजूदगी आने वाले दिनों में और भी अधिक राजनीतिक टकरावों का केंद्र बनने वाली है।
शेयर:

संबंधित ख़बरें

संसद में गतिरोध: अमित शाह का विपक्ष को प्रस्ताव, 'आज 3 बजे से कल 3 बजे तक चर्चा के लिए तैयार'
राजनीति

संसद में गतिरोध: अमित शाह का विपक्ष को प्रस्ताव, 'आज 3 बजे से कल 3 बजे तक चर्चा के लिए तैयार'

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए विपक्ष को 24 घंटे की निरंतर चर्चा का प्रस्ताव दिया है।

12 अग॰ 2026, 06:37 pm
ओमान की खाड़ी में जहाजों पर नए हमले, ईरान युद्ध वार्ताओं में गतिरोध से वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट
राजनीति

ओमान की खाड़ी में जहाजों पर नए हमले, ईरान युद्ध वार्ताओं में गतिरोध से वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट

ओमान की खाड़ी में व्यापारिक जहाजों पर नए हमलों और ईरान-अमेरिका वार्ताओं में आए गतिरोध ने वैश्विक तनाव बढ़ा दिया है, जिससे भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय में चिंता है।

12 अग॰ 2026, 05:38 pm
'इस्लामिक नाटो' और 1965 की जंग: बगदाद पैक्ट जिसने ऐन वक्त पर तोड़ा पाकिस्तान का भरोसा
राजनीति

'इस्लामिक नाटो' और 1965 की जंग: बगदाद पैक्ट जिसने ऐन वक्त पर तोड़ा पाकिस्तान का भरोसा

1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान बगदाद पैक्ट की विफलता ने दक्षिण एशिया की राजनीति को हमेशा के लिए बदल दिया। जानें कैसे 'इस्लामिक नाटो' का भ्रम टूटा।

12 अग॰ 2026, 04:37 pm