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‘झारखंड क्यों नहीं गईं?’ संसद परिसर में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और प्रियंका गांधी के बीच तीखी बहस
ICN24 Newsroom 12 अग॰ 2026, 05:37 pm

संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन के दौरान भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने प्रियंका गांधी वाड्रा से झारखंड की घटनाओं पर सवाल किया, जिस पर प्रियंका ने भी पलटवार किया।
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध के बीच एक दिलचस्प और तीखी बहस देखने को मिली। संसद परिसर में जब विपक्ष और सत्तापक्ष के सांसद अपनी-अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, तब भाजपा के वरिष्ठ सांसद निशिकांत दुबे और कांग्रेस की नवनिर्वाचित सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के बीच सीधा आमना-सामना हुआ। निशिकांत दुबे ने प्रियंका गांधी को घेरते हुए उनसे सवाल किया कि वह झारखंड की घटनाओं पर चुप क्यों हैं और वहां क्यों नहीं गईं।
यह वाकया उस समय हुआ जब विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA) के नेता केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर एनडीए के सांसद विपक्षी शासित राज्यों में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी बीच गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे प्रियंका गांधी के पास पहुंचे और उनसे पूछा, “आप वायनाड जाती हैं, उत्तर प्रदेश जाती हैं, लेकिन झारखंड में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों पर चुप क्यों हैं? आप वहां क्यों नहीं गईं?”
प्रियंका गांधी ने इस अप्रत्याशित सवाल का सामना संयम के साथ किया लेकिन उन्होंने भी तुरंत पलटवार किया। सूत्रों के अनुसार, प्रियंका ने भाजपा सांसद से सवाल किया कि क्या सत्ता पक्ष के लोग अपनी जिम्मेदारियों से भाग रहे हैं। इस दौरान दोनों पक्षों के सांसदों के बीच काफी गहमागहमी देखने को मिली। भाजपा का आरोप है कि प्रियंका गांधी और कांग्रेस पार्टी केवल उन राज्यों में मानवाधिकारों की बात करती हैं जहां भाजपा की सरकार है, जबकि झारखंड जैसे राज्यों में जहां कांग्रेस गठबंधन की सरकार है, वहां हो रहे अपराधों पर वे चुप्पी साध लेती हैं।
झारखंड में हाल के दिनों में कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भाजपा लगातार हमलावर रही है। निशिकांत दुबे ने पहले भी संसद के भीतर राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और तुष्टीकरण के आरोप लगाए हैं। प्रियंका गांधी, जो हाल ही में वायनाड उपचुनाव जीतकर पहली बार लोकसभा पहुंची हैं, भाजपा के लिए एक प्रमुख राजनीतिक लक्ष्य बनी हुई हैं। भाजपा नेताओं का मानना है कि प्रियंका की ‘चुनिंदा सक्रियता’ (selective activism) को जनता के सामने लाना जरूरी है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भारत की संसदीय कार्यवाही हमेशा से चर्चा का विषय रहती है। प्रवासी भारतीयों (NRIs) के बीच यह बहस अक्सर होती है कि क्या भारतीय राजनीति विकास के मुद्दों के बजाय व्यक्तिगत हमलों और प्रतीकात्मक विरोधों तक सीमित हो गई है। प्रियंका गांधी की संसद में मौजूदगी और उनके खिलाफ भाजपा की रणनीति आने वाले दिनों में भारतीय राजनीति की दिशा तय करेगी। संसद परिसर की यह घटना दर्शाती है कि आगामी चुनावों से पहले झारखंड जैसे चुनावी राज्यों को लेकर राजनीतिक पारा और बढ़ने वाला है।
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