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श्रीकालहस्ती और कनिपकम मंदिरों की रैंकिंग में भारी गिरावट: श्रद्धालुओं की संतुष्टि के मामले में फिसले आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तीर्थ
ICN24 Newsroom 12 अग॰ 2026, 11:37 am

आंध्र प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थल श्रीकालहस्ती और कनिपकम मंदिरों में श्रद्धालुओं की संतुष्टि दर कम हुई है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
आंध्र प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक केंद्रों में शुमार श्रीकालहस्ती और कनिपकम मंदिरों के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है। हालिया सरकारी सर्वेक्षण और श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया के आधार पर जारी की गई रैंकिंग में इन दोनों मंदिरों के प्रदर्शन में गिरावट दर्ज की गई है। विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित श्रीकालहस्ती मंदिर, जो पहले इस सूची में प्रथम स्थान पर रहता था, अब खिसक कर तीसरे स्थान पर आ गया है। यह गिरावट न केवल मंदिर प्रशासन के लिए एक चुनौती है, बल्कि उन हजारों श्रद्धालुओं के लिए भी चिंता का विषय है जो हर साल यहाँ अपनी आस्था लेकर पहुँचते हैं।
आंकड़ों के अनुसार, श्रीकालहस्ती मंदिर की रैंकिंग में लगातार गिरावट देखी जा रही है। पहले यह मंदिर गुणवत्ता और सेवाओं के मामले में पहले पायदान पर था, जहाँ से यह दूसरे और अब तीसरे स्थान पर पहुँच गया है। इसी तरह, प्रसिद्ध वरसिद्धि विनायक मंदिर, कनिपकम की रैंकिंग में भी कमी आई है। इस सर्वेक्षण में दर्शन के लिए लगने वाला समय, स्वच्छता, मंदिर कर्मचारियों का व्यवहार और बुनियादी सुविधाओं जैसे मानकों को आधार बनाया गया था। श्रद्धालुओं के फीडबैक के अनुसार, भीड़ प्रबंधन और दर्शन की प्रक्रिया में आने वाली जटिलताओं ने उनकी संतुष्टि के स्तर को प्रभावित किया है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेष रूप से दक्षिण भारतीय मूल के प्रवासियों के लिए इन मंदिरों का अत्यधिक महत्व है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों से भारत आने वाले प्रवासी अक्सर तिरुपति के साथ-साथ श्रीकालहस्ती (राहु-केतु पूजा के लिए प्रसिद्ध) और कनिपकम की यात्रा करते हैं। विदेशी यात्रियों के लिए मंदिर में पारदर्शी व्यवस्था और बेहतर सुविधाएं प्राथमिक होती हैं। रैंकिंग में इस गिरावट का असर पर्यटन और आध्यात्मिक यात्राओं पर पड़ सकता है, क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर श्रद्धालु अक्सर इन रेटिंग्स और अनुभवों को ध्यान में रखकर ही अपनी यात्रा की योजना बनाते हैं।
मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय प्रशासन के सूत्रों का कहना है कि बढ़ती भीड़ के अनुपात में सुविधाओं का विस्तार न होना इस गिरावट का मुख्य कारण हो सकता है। जहाँ तिरुपति के अन्य मंदिरों ने अपनी व्यवस्था में तकनीक का समावेश किया है, वहीं इन मंदिरों में अभी भी पुरानी पद्धतियों और अपर्याप्त संसाधनों के कारण श्रद्धालुओं को असुविधा का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से त्यौहारों और विशेष पूजा के दिनों में स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
अब समय आ गया है कि देवस्थानम विभाग और राज्य सरकार इन महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों की व्यवस्थाओं की समीक्षा करे। श्रद्धालुओं की संतुष्टि को बढ़ाने के लिए डिजिटल टोकन सिस्टम, स्वच्छता के बेहतर मापदंड और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर ध्यान देना अनिवार्य हो गया है। अगर समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में इन ऐतिहासिक मंदिरों की प्रतिष्ठा और धार्मिक पर्यटन पर इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
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