राजनीति
कौन हैं दीपाणिता मुखर्जी? श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पोती के बयान ने बंगाल की राजनीति में मचाया तहलका
ICN24 Newsroom 7 जुल॰ 2026, 11:31 pm

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पोती दीपाणिता मुखर्जी ने ममता सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि दशकों से उनके दादा की विरासत को मिटाने की साजिश हो रही थी जिसे अब नया जीवन मिला है।
पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों दीपाणिता मुखर्जी का नाम चर्चा का विषय बना हुआ है। भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पोती दीपाणिता ने हालिया राजनीतिक बदलावों के बीच ममता सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उनके एक भावुक बयान ने राज्य में दशकों से चली आ रही वैचारिक लड़ाई को एक नया मोड़ दे दिया है। दीपाणिता का आरोप है कि पिछले 70-80 वर्षों से बंगाल की धरती से उनके दादा की यादों और उनके योगदान को मिटाने की एक संगठित साजिश रची जा रही थी।
दीपाणिता मुखर्जी ने कहा कि उनके दादा ने अखंड भारत और बंगाल के हितों के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था, लेकिन आजादी के बाद की सरकारों ने जानबूझकर उन्हें इतिहास के पन्नों से ओझल करने का प्रयास किया। उन्होंने मौजूदा राजनीतिक परिवर्तन को एक 'नया जीवन' करार देते हुए कहा कि अब उनके दादा के विचारों और बलिदान को वह सम्मान मिल रहा है, जिसके वे हकदार थे। यह बयान विशेष रूप से उन समर्थकों के बीच चर्चा में है जो बंगाल में सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी सुधारों की वकालत करते रहे हैं।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय राजनीति के एक कद्दावर स्तंभ थे। उन्होंने नेहरू कैबिनेट से इस्तीफा देकर भारतीय जनसंघ की स्थापना की थी, जो आज की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का वैचारिक पूर्वज है। कश्मीर मुद्दे पर उनके स्टैंड और 'एक विधान, एक प्रधान, एक निशान' के नारे ने भारतीय राजनीति की दिशा बदल दी थी। दीपाणिता का मानना है कि बंगाल में जो वैचारिक शून्यता पैदा हुई थी, उसे अब भरा जा रहा है।
आस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेषकर पश्चिम बंगाल से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के लिए यह खबर काफी अहमियत रखती है। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में रहने वाले बंगाली समुदाय के लोग अक्सर अपने राज्य की सांस्कृतिक जड़ों और राजनीतिक उथल-पुथल पर पैनी नजर रखते हैं। डॉ. मुखर्जी की विरासत को लेकर छिड़ी यह बहस न केवल बंगाल की राजनीति को प्रभावित करेगी, बल्कि यह विदेशों में रहने वाले भारतीयों के बीच भी राष्ट्रवाद और क्षेत्रीय पहचान की नई चर्चा को जन्म देगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दीपाणिता मुखर्जी का सक्रिय होना और इस तरह के कड़े बयान देना बंगाल में आने वाले समय में ध्रुवीकरण को और तेज कर सकता है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और अन्य विपक्षी दलों ने हालांकि इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है, लेकिन दीपाणिता के शब्दों ने बंगाल के एक बड़े तबके की भावनाओं को झकझोर दिया है।
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