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दिग्विजय सिंह के राम मंदिर दान पर विवाद: वकील शशांक शेखर त्रिपाठी ने भेजा कानूनी नोटिस, पैसा वापस लेने को कहा

ICN24 Newsroom 7 जुल॰ 2026, 09:31 pm
दिग्विजय सिंह के राम मंदिर दान पर विवाद: वकील शशांक शेखर त्रिपाठी ने भेजा कानूनी नोटिस, पैसा वापस लेने को कहा

वकील शशांक शेखर त्रिपाठी ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को कानूनी नोटिस भेजकर राम मंदिर के लिए दिया गया 1.11 लाख रुपये का दान वापस लेने को कहा है।

अयोध्या में भव्य श्री राम मंदिर के निर्माण और उसकी व्यवस्थाओं को लेकर भारतीय राजनीति में बयानबाजी का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा घटनाक्रम में, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा मंदिर निर्माण के लिए दिए गए दान को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। वकील शशांक शेखर त्रिपाठी ने दिग्विजय सिंह को एक कानूनी नोटिस भेजकर उनसे आग्रह किया है कि वे राम मंदिर के लिए दिया गया अपना 1.11 लाख रुपये का दान वापस ले लें। शशांक शेखर त्रिपाठी का दावा है कि दिग्विजय सिंह के हालिया बयानों ने उन करोड़ों राम भक्तों की भावनाओं को आहत किया है, जिनकी मंदिर के प्रति अटूट श्रद्धा है। त्रिपाठी के अनुसार, एक तरफ मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग देना और दूसरी तरफ सार्वजनिक मंचों से मंदिर की व्यवस्था और उसकी पवित्रता पर सवाल उठाना, उनके दोहरे चरित्र को दर्शाता है। नोटिस में कहा गया है कि यदि दिग्विजय सिंह को मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली या वहां की व्यवस्थाओं से इतनी ही आपत्ति है, तो उन्हें अपनी दान राशि वापस ले लेनी चाहिए। यह विवाद तब शुरू हुआ जब दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा और मंदिर के स्थान को लेकर कुछ टिप्पणियां की थीं। इन बयानों को भारतीय जनता पार्टी और कई हिंदू संगठनों ने मंदिर विरोधी और अपमानजनक करार दिया था। वकील त्रिपाठी ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया है कि वे व्यक्तिगत रूप से इस राशि को वापस करने का प्रबंध करने को तैयार हैं, ताकि मंदिर के पवित्र कोष में ऐसे व्यक्ति का पैसा न रहे जो इसकी आलोचना करता हो। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों ने राम मंदिर निर्माण के दौरान न केवल भारी उत्साह दिखाया था, बल्कि वहां के मंदिरों में विशेष उत्सव भी आयोजित किए थे। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय प्रवासियों के बीच मंदिर के प्रति गहरी भावनात्मक संलिप्तता है, और भारत में मंदिर से जुड़े किसी भी राजनीतिक विवाद पर वहां भी तीखी प्रतिक्रिया देखी जाती है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के कानूनी नोटिस और सार्वजनिक विरोध आगामी चुनावों से पहले ध्रुवीकरण की राजनीति का हिस्सा हो सकते हैं। दिग्विजय सिंह ने अब तक इस कानूनी नोटिस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, कांग्रेस पार्टी अक्सर यह तर्क देती रही है कि मंदिर पर किसी एक विचारधारा या पार्टी का एकाधिकार नहीं है और सवाल उठाना लोकतंत्र का हिस्सा है। फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दिग्विजय सिंह इस नोटिस का जवाब देते हैं या इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हैं।
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