राजनीति
आदित्य ठाकरे का बीजेपी पर तीखा हमला: "हम छोटे लोग, हमारी पहुंच पीएम मोदी तक नहीं"
ICN24 Newsroom 11 अग॰ 2026, 01:37 am

शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने केंद्र सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे 'छोटे लोग' हैं जिनकी पहुंच प्रधानमंत्री तक नहीं है, साथ ही उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रवाद पर भी सवाल उठाए।
शिवसेना (यूबीटी) के युवा नेता और पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हाल ही में मीडिया से बातचीत के दौरान ठाकरे ने तीखे कटाक्ष और व्यंग्य का सहारा लेते हुए केंद्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की पहुंच और क्षेत्रीय नेताओं के प्रति उनके रवैये को निशाने पर लिया। ठाकरे ने तंज कसते हुए कहा, "हम बहुत छोटे लोग हैं, हमारी पहुंच प्रधानमंत्री मोदी तक नहीं है।"
आदित्य ठाकरे का यह बयान उस समय आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग चरम पर है। ठाकरे ने न केवल सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए, बल्कि बीजेपी के 'राष्ट्रवाद' के दावों पर भी निशाना साधा। उन्होंने देश के गौरव और राष्ट्रीय ध्वज 'तिरंगा' का जिक्र करते हुए कहा कि यह वास्तव में एक अच्छी बात है कि आजादी के इतने दशकों बाद बीजेपी को कम से कम तिरंगे की याद तो आई। उनका यह इशारा सीधे तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और बीजेपी के वैचारिक अतीत की ओर था, जिसे विपक्षी दल अक्सर तिरंगे के प्रति उनके पुराने रुख को लेकर घेरते रहे हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आदित्य ठाकरे की यह रणनीति खुद को 'आम आदमी' और 'जमीन से जुड़े नेता' के रूप में स्थापित करने की है। "छोटे लोग" शब्द का प्रयोग कर उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वर्तमान सत्ता का केंद्र इतना शक्तिशाली और दूर हो गया है कि वह क्षेत्रीय अस्मिता और स्थानीय नेतृत्व की आवाज सुनने को तैयार नहीं है। यह बयान महाराष्ट्र के मतदाताओं, विशेषकर युवाओं को यह समझाने की कोशिश है कि शिवसेना (यूबीटी) ही वह एकमात्र दल है जो दिल्ली की 'शक्ति' के सामने झुकने के बजाय महाराष्ट्र के हितों की रक्षा कर सकता है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेष रूप से महाराष्ट्र से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के लिए, महाराष्ट्र की यह राजनीतिक हलचल बहुत मायने रखती है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले मराठी भाषी लोग सोशल मीडिया और न्यूज़ पोर्टल्स के माध्यम से इन घटनाओं पर बारीकी से नजर रखते हैं। उनके लिए महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिरता का मतलब राज्य में निवेश और विकास की निरंतरता है। आदित्य ठाकरे का यह रुख प्रवासी भारतीयों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि वे अक्सर भारत के संघीय ढांचे में राज्यों की भूमिका को महत्वपूर्ण मानते हैं।
आदित्य ठाकरे ने महाराष्ट्र में चल रही विकास परियोजनाओं और उद्योगों के अन्य राज्यों में जाने के मुद्दे को भी इस 'पहुंच' की कमी से जोड़ा। उन्होंने संकेत दिया कि जब तक क्षेत्रीय नेतृत्व की बात केंद्र तक नहीं पहुंचेगी, तब तक महाराष्ट्र के साथ न्याय होना मुश्किल है। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए, ठाकरे का यह कड़ा रुख यह स्पष्ट करता है कि महा विकास अघाड़ी (MVA) आने वाले दिनों में बीजेपी और शिंदे गुट को 'क्षेत्रीय स्वाभिमान' के मुद्दे पर कड़ी टक्कर देने के लिए तैयार है। बेरोजगारी, महंगाई और स्थानीय विकास जैसे जमीनी मुद्दों को केंद्र के 'बड़े वादों' के खिलाफ खड़ा करना ही ठाकरे की मौजूदा चुनावी रणनीति का मुख्य हिस्सा नजर आता है।
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