राजनीति
तमिलनाडु विधानसभा का बड़ा फैसला: सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत अब 'तमिल थाई वाजथु' से होगी अनिवार्य
ICN24 Newsroom 11 अग॰ 2026, 12:37 am

तमिलनाडु विधानसभा ने मुख्यमंत्री विजय द्वारा पेश किए गए उस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया है, जिसके तहत अब राज्य के सभी सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत राज्य गीत 'तमिल थाई वाजथु' से करना अनिवार्य होगा।
तमिलनाडु की राजनीति और सांस्कृतिक पहचान की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, राज्य विधानसभा ने सरकारी कार्यक्रमों के संचालन के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। मुख्यमंत्री विजय द्वारा पेश किए गए एक नए प्रस्ताव को सदन ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया है। इस नए नियम के लागू होने के बाद, तमिलनाडु में आयोजित होने वाले किसी भी आधिकारिक सरकारी कार्यक्रम की शुरुआत अब अनिवार्य रूप से राज्य गीत 'तमिल थाई वाजथु' के साथ की जाएगी।
विधानसभा में इस प्रस्ताव को पेश करते हुए मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि यह निर्णय तमिल भाषा की समृद्धि और राज्य की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 'तमिल थाई वाजथु' केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह करोड़ों तमिल भाषी लोगों की भावनाओं और उनकी अस्मिता का प्रतीक है। सदन में मौजूद सभी दलों ने भाषाई गौरव के इस विषय पर एकजुटता दिखाई और बिना किसी विरोध के इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी।
तकनीकी रूप से, यह आदेश सुनिश्चित करता है कि राज्य सरकार के सभी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों द्वारा आयोजित आधिकारिक समारोहों में प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाए। इससे पहले भी राज्य गीत को लेकर विभिन्न दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन विधायी प्रस्ताव के माध्यम से इसे अनिवार्य बनाना सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। यह कदम तमिल भाषा को प्रशासनिक और सार्वजनिक जीवन में शीर्ष स्थान देने की सरकार की व्यापक नीति का हिस्सा माना जा रहा है।
इस निर्णय का प्रभाव केवल तमिलनाडु की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में रह रहे तमिल समुदाय के बीच भी इसकी गहरी गूंज सुनाई दे रही है। ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में, जहाँ तमिल प्रवासियों की एक बड़ी आबादी बसती है, इस तरह के सांस्कृतिक फैसलों को अपनी जड़ों से जुड़ने के रूप में देखा जाता है। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई तमिल समुदाय के लोग अक्सर अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए स्थानीय स्तर पर कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। तमिलनाडु सरकार का यह फैसला वैश्विक स्तर पर तमिल पहचान को और मजबूती प्रदान करेगा।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्यमंत्री विजय का यह कदम राज्य में भाषाई राजनीति को एक नई दिशा दे सकता है। तमिलनाडु हमेशा से अपनी भाषाई स्वायत्तता और सांस्कृतिक विशिष्टता के लिए जाना जाता रहा है। 'तमिल थाई वाजथु' को अनिवार्य करने से न केवल स्थानीय स्तर पर भाषाई गौरव बढ़ेगा, बल्कि यह केंद्र और राज्यों के बीच होने वाले सांस्कृतिक विमर्श में भी तमिलनाडु की स्थिति को स्पष्ट करेगा।
कुल मिलाकर, यह विधायी निर्णय तमिलनाडु के सामाजिक-सांस्कृतिक ताने-बाने को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक मील का पत्थर है। प्रशासन ने अब सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि वे सुनिश्चित करें कि भविष्य में होने वाले कार्यक्रमों में इस नए प्रोटोकॉल का पूरी निष्ठा के साथ पालन किया जाए।
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