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अमेरिकी वीजा रिजेक्शन की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल, भारतीय छात्रों के बीच बढ़ी चिंता

ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 08:31 am
अमेरिकी वीजा रिजेक्शन की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल, भारतीय छात्रों के बीच बढ़ी चिंता

मुंबई में एक भारतीय छात्र का अमेरिकी वीजा आवेदन खारिज होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। विशेषज्ञों ने विश्वविद्यालय चयन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

मुंबई स्थित अमेरिकी दूतावास में एक भारतीय छात्र के वीजा आवेदन के खारिज होने की आपबीती इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। रेडिट (Reddit) पर साझा की गई इस पोस्ट ने न केवल अमेरिका जाने के इच्छुक छात्रों की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि वीजा साक्षात्कार की प्रक्रिया और सफलता की दर पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, उक्त छात्र को अमेरिका की 'मिशिगन टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी' में मास्टर प्रोग्राम के लिए प्रवेश मिला था। अपनी शैक्षणिक योग्यता और तैयारी के बावजूद, मुंबई वाणिज्य दूतावास (Consulate) में उसका साक्षात्कार बहुत संक्षिप्त रहा और अंततः उसे रिजेक्शन (214b) का सामना करना पड़ा। छात्र ने बताया कि साक्षात्कार के दौरान अधिकारी ने केवल कुछ बुनियादी सवाल पूछे और कुछ ही मिनटों में उसका आवेदन अस्वीकार कर दिया। सोशल मीडिया पर इस पोस्ट के वायरल होने के बाद, आव्रजन विशेषज्ञों और अनुभवी छात्रों ने इस पर अपनी राय दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में छात्र द्वारा चुने गए विश्वविद्यालयों का मिश्रण (Mix of Universities) एक बड़ा कारण हो सकता है। छात्र ने जिन अन्य विश्वविद्यालयों में आवेदन किया था, वे शैक्षणिक रैंकिंग और प्रोफाइल के मामले में एक-दूसरे से काफी भिन्न थे। विशेषज्ञों के अनुसार, वीजा अधिकारी अक्सर यह देखते हैं कि क्या छात्र का अकादमिक करियर एक सुसंगत दिशा में है या वह केवल किसी भी तरह अमेरिका पहुंचने की कोशिश कर रहा है। यह घटना केवल अमेरिका तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है। ऑस्ट्रेलिया ने भी हाल के महीनों में अपनी 'जेनुइन स्टूडेंट' (GS) कसौटी को कड़ा किया है। जिस तरह अमेरिका में 'यूनिवर्सिटी प्रोफाइल' को बारीकी से देखा जा रहा है, उसी तरह ऑस्ट्रेलियाई गृह विभाग भी अब छात्रों के पिछले शैक्षणिक रिकॉर्ड और उनके द्वारा चुने गए पाठ्यक्रमों के बीच के संबंध की गहन जांच कर रहा है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के शिक्षा सलाहकारों का कहना है कि छात्रों को अपने भविष्य के प्रति स्पष्टता दिखानी चाहिए, अन्यथा वीजा रिजेक्शन की संभावना बढ़ जाती है। रेडिट पोस्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि उस दिन उसी काउंटर पर कई अन्य आवेदकों को भी रिजेक्शन मिला था। इससे यह संकेत मिलता है कि वीजा नियमों और उनके कार्यान्वयन में सख्ती बढ़ी है। अक्सर छात्र एजेंटों के बहकावे में आकर ऐसे कॉलेजों का चयन कर लेते हैं जो वीजा अधिकारियों की 'रेड फ्लैग' सूची में होते हैं। यह वायरल पोस्ट अब छात्रों के बीच एक सबक की तरह देखी जा रही है कि केवल प्रवेश पत्र (I-20) प्राप्त कर लेना ही सफलता की गारंटी नहीं है, बल्कि साक्षात्कार की तैयारी और सही संस्थान का चुनाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
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