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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी नहीं थमा छात्रों का आक्रोश, CJP ने दी मोदी सरकार को कडी चेतावनी

ICN24 Newsroom 28 जुल॰ 2026, 02:36 am
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी नहीं थमा छात्रों का आक्रोश, CJP ने दी मोदी सरकार को कडी चेतावनी

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बावजूद छात्र आंदोलन थमता नजर नहीं आ रहा है। CJP ने पुलिस कार्रवाई और समझौते के उल्लंघन को लेकर सरकार को चेतावनी दी है।

भारत में शिक्षा मंत्रालय को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबरों के बाद भी छात्रों का आंदोलन शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र संगठन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा सड़कों पर हैं। सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) ने अब इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए मोदी सरकार को कड़ी चेतावनी जारी की है। संस्था ने आरोप लगाया है कि सरकार छात्रों के साथ हुए समझौतों का उल्लंघन कर रही है और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दमनकारी नीतियों का उपयोग किया जा रहा है। CJP की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि हाल के दिनों में छात्रों की गिरफ्तारियां और उन पर की गई पुलिस कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। संगठन का दावा है कि सरकार ने पूर्व में जो आश्वासन दिए थे, उन्हें पूरा करने के बजाय पुलिस बल का प्रयोग कर आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। छात्र समूहों का मुख्य आक्रोश राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं की शुचिता और पारदिर्शता को लेकर है, जिसने लाखों युवाओं के भविष्य को अधर में लटका दिया है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर चिंता का विषय बनी हुई है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे कई भारतीय परिवारों के बच्चे अभी भी भारत में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं या वहां की प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय का मानना है कि भारत की शिक्षा प्रणाली की साख वैश्विक स्तर पर बनी रहनी चाहिए। यदि परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं, तो इसका असर विदेशों में भारतीय डिग्रियों की मान्यता और सम्मान पर भी पड़ सकता है। भारतीय प्रवासियों के बीच इस बात को लेकर भी चर्चा है कि क्या भारत में शैक्षणिक सुधार अब अनिवार्य हो गए हैं। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि इस्तीफा देना समाधान का केवल एक हिस्सा है, असली मुद्दा व्यवस्थागत सुधार है। छात्र संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक गिरफ्तार छात्रों को रिहा नहीं किया जाता और परीक्षा प्रणाली में ठोस पारदर्शिता नहीं लाई जाती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक गरमा दिया है। इस समय केंद्र सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर उसे छात्रों के गुस्से को शांत कर शिक्षा प्रणाली पर भरोसा बहाल करना है, तो दूसरी ओर विपक्ष और नागरिक संगठनों के बढ़ते दबाव का सामना करना है। CJP की ताजा चेतावनी ने इस आग में घी डालने का काम किया है, जिससे आने वाले दिनों में आंदोलन के और अधिक उग्र होने की संभावना जताई जा रही है।
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