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कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग में ज्ञानेश्वरी यादव ने जीता सिल्वर, इलेक्ट्रिशियन पिता बोले- 'बेटी ने देश का सपना सच कर दिया'

ICN24 Newsroom 28 जुल॰ 2026, 06:38 am
कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग में ज्ञानेश्वरी यादव ने जीता सिल्वर, इलेक्ट्रिशियन पिता बोले- 'बेटी ने देश का सपना सच कर दिया'

राजनांदगांव की ज्ञानेश्वरी यादव ने कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर भारत का मान बढ़ाया है। साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली ज्ञानेश्वरी की इस सफलता ने खेल जगत को प्रेरित किया है।

भारत की उभरती हुई वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव की रहने वाली ज्ञानेश्वरी ने कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में रजत पदक (सिल्वर मेडल) जीतकर न केवल अपने राज्य, बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है। यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि ज्ञानेश्वरी एक बहुत ही साधारण परिवार से आती हैं और उनकी इस सफलता के पीछे उनके पिता के वर्षों का संघर्ष और अटूट विश्वास छिपा है। राजनांदगांव के एक छोटे से घर में खुशियों का माहौल है। ज्ञानेश्वरी के पिता, जो पेशे से एक इलेक्ट्रिशियन हैं, अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर फूले नहीं समा रहे हैं। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ज्ञानेश्वरी ने बचपन से ही खेल के प्रति अपना समर्पण दिखाया था। संसाधनों की कमी के बावजूद, उन्होंने कभी अपनी बेटी के सपनों के बीच गरीबी को नहीं आने दिया। उन्होंने कहा, "एक समय था जब हमें उसकी डाइट और ट्रेनिंग के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता था, लेकिन आज उसकी मेहनत ने हमें वह सम्मान दिलाया है जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी। अब मेरा सपना है कि वह ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड लेकर आए।" ज्ञानेश्वरी की यह सफलता ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी गर्व का विषय है। कॉमनवेल्थ गेम्स और चैंपियनशिप्स का ऑस्ट्रेलिया में विशेष महत्व है, और भारतीय एथलीटों का शानदार प्रदर्शन यहाँ रह रहे प्रवासियों को अपनी जड़ों से जोड़ता है। ज्ञानेश्वरी जैसी युवा प्रतिभाएं यह सिद्ध करती हैं कि यदि अवसर और दृढ़ संकल्प हो, तो छोटे शहरों के खिलाड़ी भी विश्व स्तर पर बड़ी बाधाओं को पार कर सकते हैं। प्रतियोगिता के दौरान ज्ञानेश्वरी ने क्लीन एंड जर्क और स्नैच श्रेणियों में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने अपनी तकनीक और ताकत के बल पर प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी टक्कर दी। उनके कोच और खेल विशेषज्ञों का मानना है कि ज्ञानेश्वरी की तकनीक में गजब का सुधार हुआ है और वह आने वाले वर्षों में भारत के लिए मीराबाई चानू जैसी बड़ी स्टार बन सकती हैं। छत्तीसगढ़ सरकार और खेल मंत्रालय ने भी ज्ञानेश्वरी की इस उपलब्धि की सराहना की है। यह मेडल भारत के उन हजारों युवाओं के लिए एक मिसाल है जो सीमित संसाधनों में बड़े सपने देखते हैं। ज्ञानेश्वरी अब आगामी एशियाई खेलों और विश्व चैंपियनशिप की तैयारी में जुटने वाली हैं, जहाँ उनकी नजरें स्वर्ण पदक पर टिकी होंगी। उनके पिता का अटूट विश्वास और ज्ञानेश्वरी का कड़ा परिश्रम आज भारतीय खेल जगत की एक प्रेरक कहानी बन चुका है।
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