राजनीति
वर्दी पहनकर मंच से इस्तीफा देने वाले सिपाही शेर सिंह सेवा से बर्खास्त, उत्तराखंड पुलिस की बड़ी कार्रवाई
ICN24 Newsroom 7 अग॰ 2026, 04:37 am
जंतर-मंतर पर आंदोलन के दौरान वर्दी में इस्तीफा देने वाले उत्तराखंड के सिपाही शेर सिंह को विभागीय जांच के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
उत्तराखंड पुलिस ने अनुशासनहीनता के खिलाफ एक बड़ा कड़ा कदम उठाते हुए सिपाही शेर सिंह को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। शेर सिंह उस समय सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित एक छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस की वर्दी पहनकर मंच से अपने इस्तीफे की घोषणा की थी। पिथौरागढ़ जिला पुलिस प्रशासन द्वारा की गई इस कार्रवाई ने पुलिस महकमे के भीतर अनुशासन और आचरण नियमावली को लेकर एक स्पष्ट संदेश दिया है।
पिथौरागढ़ के पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने विभागीय जांच की रिपोर्ट के आधार पर शेर सिंह की बर्खास्तगी के आदेश जारी किए। जांच में पाया गया कि सिपाही ने न केवल पुलिस सेवा के कड़े नियमों का उल्लंघन किया, बल्कि वर्दी की गरिमा को भी ठेस पहुंचाई। पुलिस नियमावली के अनुसार, किसी भी सेवारत अधिकारी या कर्मचारी को राजनीतिक गतिविधियों या सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से भाग लेने की अनुमति नहीं होती, विशेषकर वर्दी में रहकर ऐसा करना गंभीर अपराध माना जाता है।
यह मामला तब शुरू हुआ जब उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर छात्रों का आंदोलन चल रहा था। इसी दौरान शेर सिंह, जो पहले से ही निलंबित चल रहे थे, दिल्ली पहुंचे और जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी वर्दी की शपथ ली और मंच से ही त्यागपत्र देने का नाटक किया। उनके इस कृत्य का वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हुआ था, जिसके बाद उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय ने इस मामले का कड़ा संज्ञान लिया।
विभागीय जांच के दौरान शेर सिंह को अपनी सफाई देने के अवसर दिए गए, लेकिन अधिकारियों के अनुसार, उनके तर्क संतोषजनक नहीं थे। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि शेर सिंह का व्यवहार एक अनुशासित बल के सदस्य के रूप में पूरी तरह से अस्वीकार्य था। पिथौरागढ़ पुलिस ने आधिकारिक बयान में कहा कि वर्दी पहनकर विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बनना और राजनीतिक मंच साझा करना पुलिस आचरण नियमावली का सीधा उल्लंघन है, जिसके लिए बर्खास्तगी ही उचित कार्रवाई है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए भी यह घटना ध्यान देने योग्य है, क्योंकि यह भारत में सिविल सेवाओं और सुरक्षा बलों के भीतर कड़े अनुशासन तंत्र को दर्शाती है। ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी सुरक्षा कर्मियों के राजनीतिक बयानों पर सख्त नियम लागू होते हैं। भारत में पुलिस बल एक अर्ध-सैनिक ढांचे की तरह काम करता है, जहां सार्वजनिक रूप से सरकार की नीतियों का विरोध करना या सेवा के दौरान राजनीतिक सक्रियता दिखाना सेवा समाप्ति का आधार बन सकता है। शेर सिंह की बर्खास्तगी भविष्य के लिए एक मिसाल के रूप में देखी जा रही है कि वर्दी का उपयोग व्यक्तिगत या राजनीतिक लाभ के लिए नहीं किया जा सकता।
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