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नागालैंड: ग्रामीण मिशन के कर्मचारियों को दी गई भारतीय सांकेतिक भाषा की ट्रेनिंग, दिव्यांगों की मदद के लिए नई पहल
ICN24 Newsroom 7 अग॰ 2026, 03:38 am
नागालैंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने कोहिमा में फील्ड स्टाफ के लिए दो दिवसीय भारतीय सांकेतिक भाषा प्रशिक्षण आयोजित किया, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में दिव्यांगों को बेहतर सेवा दी जा सके।
कोहिमा: नागालैंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (NSRLM) ने ग्रामीण समुदायों में समावेशिता और सुलभ सेवा वितरण को मजबूती देने के लिए एक सराहनीय कदम उठाया है। 4 और 5 अगस्त को कोहिमा के रूरल डेवलपमेंट मिनी कॉन्फ्रेंस हॉल में 'सोशल इंक्लूजन एंड सोशल डेवलपमेंट' (SISD) वर्टिकल के तहत इमर्शन साइट स्टाफ के लिए भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में दिव्यांग व्यक्तियों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना और उनके साथ प्रभावी संवाद स्थापित करना है। प्रशिक्षण सत्रों का संचालन प्रमाणित भारतीय सांकेतिक भाषा दुभाषिया रुओकुओख्रीनुओ विजोथा ने किया। उन्होंने कर्मचारियों को सांकेतिक भाषा की बारीकियों, मूक-बधिर संस्कृति, बुनियादी संकेतों, अभिवादन, संख्याओं और रोजमर्रा की बातचीत के कौशल के बारे में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
एनआरएलएम (NSRLM) के मुख्य परिचालन अधिकारी (कार्यक्रम) एम. रोलन लोथा ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए एक ऐसे इकोसिस्टम के निर्माण पर जोर दिया जो दिव्यांग व्यक्तियों की जरूरतों को समझे और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाने से ही ग्रामीण स्तर पर समावेशी और न्यायसंगत सेवा वितरण संभव हो पाएगा। लोथा ने कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे इस प्रशिक्षण का लाभ उठाकर जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाएं।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए इस तरह की खबरें विशेष महत्व रखती हैं। ऑस्ट्रेलिया में राष्ट्रीय विकलांगता बीमा योजना (NDIS) जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से समावेशिता के जो वैश्विक मानक स्थापित किए गए हैं, भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में भी अब उसी दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। भारत के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में सांकेतिक भाषा को सरकारी सेवा का हिस्सा बनाना एक बड़ी सामाजिक उपलब्धि है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को प्रदर्शन, रोल प्ले और समूह गतिविधियों के माध्यम से यह समझाया गया कि कैसे चेहरे के भाव और गैर-मौखिक संचार के जरिए बाधाओं को दूर किया जा सकता है। संसाधन व्यक्ति विजोथा ने रेखांकित किया कि संचार की बाधाएं दूर होने से ही दिव्यांग व्यक्ति समाज की मुख्यधारा में समान रूप से भाग ले सकेंगे।
मिशन का मानना है कि फील्ड स्टाफ को इन कौशलों से लैस करने से न केवल सरकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण विकास की पहल में समानता, गरिमा और समावेशिता के सिद्धांतों को भी बल मिलेगा। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने इस व्यवहारिक प्रशिक्षण की सराहना की और अपने कार्यक्षेत्र में इन कौशलों को लागू करने की प्रतिबद्धता जताई।
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