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पूर्व मेयर समीर कुमार हत्याकांड: साक्ष्यों के अभाव में सभी 6 आरोपी बरी, कोर्ट में नहीं टिक सका अभियोजन पक्ष का दावा

ICN24 Newsroom 7 अग॰ 2026, 12:40 am
पूर्व मेयर समीर कुमार हत्याकांड: साक्ष्यों के अभाव में सभी 6 आरोपी बरी, कोर्ट में नहीं टिक सका अभियोजन पक्ष का दावा

मुजफ्फरपुर की एक अदालत ने पूर्व मेयर समीर कुमार और उनके ड्राइवर की हत्या के मामले में सभी छह आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है।

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के चर्चित पूर्व मेयर समीर कुमार और उनके ड्राइवर रोहित सहनी हत्याकांड में कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। मुजफ्फरपुर की एक विशेष अदालत ने इस मामले के पहले सत्र परीक्षण (Session Trial) के सभी छह आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। अभियोजन पक्ष अदालत में आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें संदेह का लाभ (Benefit of Doubt) देते हुए रिहा करने का आदेश दिया। यह घटना 23 सितंबर, 2018 की शाम की है, जिसने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया था। मुजफ्फरपुर के नगर थाना क्षेत्र स्थित अग्निशन कार्यालय के पास अपराधियों ने समीर कुमार की कार को घेर लिया था। हमलावरों ने एके-47 जैसे अत्याधुनिक हथियार से अंधाधुंध फायरिंग की थी। इस हमले में पूर्व मेयर और उनके ड्राइवर की मौके पर ही मौत हो गई थी। सरेराह हुए इस हत्याकांड ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे और राजनीतिक गलियारों में भारी आक्रोश पैदा किया था। पुलिस जांच के दौरान कई हाई-प्रोफाइल नाम सामने आए थे। पुलिस ने इस मामले में सुजीत कुमार, नवीन कुमार और अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई गवाहों को अदालत के समक्ष पेश किया, लेकिन इनमें से कई गवाह अपने बयानों से मुकर गए। इसके अतिरिक्त, फॉरेंसिक साक्ष्य और तकनीकी प्रमाण भी आरोपियों को अपराध से सीधे तौर पर जोड़ने में नाकाम रहे। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। मुजफ्फरपुर के कानूनी हलकों में इस फैसले को पुलिस जांच की बड़ी विफलता के रूप में देखा जा रहा है। इतने संवेदनशील मामले में, जहां एके-47 का इस्तेमाल हुआ था, ठोस सबूतों का न मिल पाना जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाता है। बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया था कि उनके मुवक्किलों को राजनीतिक द्वेष के कारण फंसाया गया था और पुलिस के पास उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं था। प्रवासी भारतीय समुदाय, विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले बिहार मूल के लोग, अक्सर अपने गृह राज्य की सुरक्षा स्थिति और न्याय व्यवस्था पर करीब से नजर रखते हैं। इस प्रकार के फैसलों से न्याय प्रणाली में विश्वास और जांच एजेंसियों की कार्यक्षमता को लेकर अक्सर समुदाय के भीतर चर्चाएं होती हैं। समीर कुमार एक लोकप्रिय नेता थे और उनके समर्थकों के लिए यह फैसला निराशाजनक साबित हुआ है। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करेगी या नहीं।
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