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होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा को लेकर ओमान में चर्चा, अमेरिका ने ईरान से मांगी मुक्त आवाजाही की गारंटी

ICN24 Newsroom 12 जुल॰ 2026, 09:31 am
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा को लेकर ओमान में चर्चा, अमेरिका ने ईरान से मांगी मुक्त आवाजाही की गारंटी

ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर अहम चर्चा हुई है, जिसमें अमेरिका ने स्वतंत्र समुद्री पहुंच की मांग की है।

दुबई और मस्कट के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शनिवार को अपने ओमानी समकक्ष के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसका मुख्य केंद्र बिंदु होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना था। इस वार्ता के दौरान वाशिंगटन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह इस रणनीतिक जलमार्ग के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए स्वतंत्र और सार्वजनिक पहुंच चाहता है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव अपने चरम पर है और वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन मार्गों में से एक है। वैश्विक पेट्रोलियम उपभोग का लगभग पांचवां हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यदि इस मार्ग में कोई भी व्यवधान आता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए इस क्षेत्र में नेविगेशन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना न केवल आर्थिक बल्कि सामरिक दृष्टि से भी अनिवार्य है। ओमान, जिसने लंबे समय से ईरान और पश्चिम के बीच एक विश्वसनीय मध्यस्थ के रूप में कार्य किया है, एक बार फिर तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया अपनी ऊर्जा जरूरतों और ईंधन के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर है। यदि होर्मुज के आसपास तनाव के कारण तेल की कीमतों में वृद्धि होती है, तो इसका सीधा असर ऑस्ट्रेलिया में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे मुद्रास्फीति और परिवहन लागत बढ़ सकती है। इसके साथ ही, भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और स्थिरता भी इन कूटनीतिक वार्ताओं के नतीजों पर टिकी है। ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, अराघची ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र की सुरक्षा वहां के देशों की जिम्मेदारी होनी चाहिए और विदेशी हस्तक्षेप से तनाव और बढ़ सकता है। हालांकि, अमेरिका का तर्क है कि इस जलमार्ग का अंतरराष्ट्रीय चरित्र इसे किसी भी एक राष्ट्र के पूर्ण नियंत्रण से मुक्त रखता है। आगामी दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ओमान की मध्यस्थता ईरान और अमेरिका के बीच किसी समझौते का मार्ग प्रशस्त कर पाती है, जिससे वैश्विक व्यापारिक जहाजों को बिना किसी डर के आवाजाही की अनुमति मिल सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वार्ता का उद्देश्य केवल तात्कालिक सुरक्षा चिंताओं को दूर करना नहीं है, बल्कि भविष्य के किसी भी बड़े सैन्य टकराव को टालना भी है। भारतीय उपमहाद्वीप और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के लिए, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता में गहरा हित रखते हैं, खाड़ी क्षेत्र की शांति उनकी अपनी आर्थिक प्रगति की कुंजी है। यदि यह कूटनीतिक प्रयास सफल होता है, तो इससे न केवल ऊर्जा बाजार में स्थिरता आएगी, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूती मिलेगी।
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