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मानसून में क्यों कम हो जाती है आपकी भूख? जानें इसके पीछे का विज्ञान और पाचन सुधारने के कारगर उपाय

ICN24 Newsroom 12 जुल॰ 2026, 06:31 am
मानसून में क्यों कम हो जाती है आपकी भूख? जानें इसके पीछे का विज्ञान और पाचन सुधारने के कारगर उपाय

मानसून के दौरान उमस और तापमान में बदलाव के कारण अक्सर भूख कम हो जाती है। जानें इस बदलाव के कारण और पाचन को बेहतर बनाने के घरेलू नुस्खे।

मानसून का आगमन चिलचिलाती गर्मी से राहत तो लाता है, लेकिन यह अपने साथ स्वास्थ्य संबंधी कई चुनौतियां भी लेकर आता है। अक्सर इस मौसम में लोगों को भूख कम लगने, भारीपन महसूस होने या पाचन संबंधी समस्याओं की शिकायत रहती है। यदि आप भी इन दिनों कम खाना खा रहे हैं, तो आप अकेले नहीं हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान भूख में कमी आना एक आम शारीरिक प्रतिक्रिया है, जिसके पीछे ठोस वैज्ञानिक और जैविक कारण मौजूद हैं। भूख कम लगने का सबसे मुख्य कारण वातावरण में बढ़ी हुई नमी यानी ह्यूमिडिटी (Humidity) है। जब हवा में नमी अधिक होती है, तो शरीर के लिए पसीने के माध्यम से तापमान को नियंत्रित करना कठिन हो जाता है। ऐसे में शरीर अपनी आंतरिक गर्मी को संतुलित रखने के लिए मेटाबॉलिज्म की गति को धीमा कर देता है। चूंकि भोजन के पाचन से शरीर में ऊष्मा (heat) उत्पन्न होती है, इसलिए शरीर प्राकृतिक रूप से कम भूख का संकेत देता है ताकि अतिरिक्त गर्मी पैदा न हो। आयुर्वेद में इसे 'मंदाग्नि' कहा जाता है, जहां वर्षा ऋतु के दौरान जठराग्नि (पाचन की अग्नि) कमजोर पड़ जाती है। इसके अलावा, मानसून के दौरान शारीरिक गतिविधि में कमी भी भूख न लगने का एक बड़ा कारण है। बारिश के कारण बाहर टहलना या व्यायाम करना सीमित हो जाता है, जिससे ऊर्जा की खपत कम होती है और शरीर को अधिक कैलोरी की आवश्यकता महसूस नहीं होती। साथ ही, इस मौसम में जल जनित संक्रमणों (water-borne diseases) का खतरा बढ़ जाता है। हल्का संक्रमण भी लिवर और पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकता है, जिससे अरुचि पैदा होती है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए, जो अक्सर इस दौरान भारत की यात्रा करते हैं या क्वींसलैंड जैसे उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में रहते हैं, यह जानकारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। अपनी भूख और पाचन को वापस पटरी पर लाने के लिए कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाए जा सकते हैं। सबसे पहले, भारी और तैलीय भोजन के बजाय हल्का और सुपाच्य आहार लें। अदरक का एक छोटा टुकड़ा सेंधा नमक के साथ भोजन से 30 मिनट पहले चबाने से पाचक रसों का स्राव बढ़ता है। इसके अलावा, ठंडे पानी के बजाय हल्का गुनगुना पानी पीना पाचन तंत्र को सक्रिय रखता है। हर्बल टी या काढ़ा भी इस मौसम में काफी फायदेमंद साबित होता है। तुलसी, काली मिर्च और दालचीनी का मिश्रण न केवल भूख बढ़ाता है बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करता है। ध्यान रखें कि भले ही भूख कम हो, लेकिन शरीर में पानी की कमी न होने दें। नींबू पानी या छाछ जैसे तरल पदार्थों का सेवन करें। यदि भूख में कमी के साथ अत्यधिक थकान, बुखार या पेट दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सा परामर्श लेना अनिवार्य है।
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