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‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में पर्यावरण संरक्षण बना जन-आंदोलन

ICN24 Newsroom 12 जुल॰ 2026, 05:31 am
‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में पर्यावरण संरक्षण बना जन-आंदोलन

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के तहत वन महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों और स्थानीय नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान को व्यापक जन-आंदोलन का रूप दिया जा रहा है। हाल ही में भेलवाडीह स्थित प्रयास आवासीय विद्यालय में आयोजित ‘वन महोत्सव’ ने इस भावना को और अधिक मजबूती प्रदान की है। इस कार्यक्रम के माध्यम से न केवल वृक्षारोपण किया गया, बल्कि भावी पीढ़ी को प्रकृति के प्रति उनकी जिम्मेदारी का बोध भी कराया गया। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के विभिन्न हिस्सों में इस अभियान के तहत हजारों पौधे लगाए जा रहे हैं। प्रयास आवासीय विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में जिला प्रशासन के अधिकारियों, शिक्षकों और छात्रों ने मिलकर नीम, पीपल, बरगद और फलदार वृक्षों का रोपण किया। इस पहल की सबसे अनूठी बात यह है कि हर पौधा किसी न किसी की माँ की स्मृति या उनके सम्मान में लगाया जा रहा है, जिससे लोगों का इस मुहिम के साथ एक भावनात्मक जुड़ाव पैदा हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी सरकारी योजना को भावनाओं से जोड़ दिया जाता है, तो वह केवल एक प्रशासनिक कार्य न रहकर जन-भागीदारी का माध्यम बन जाती है। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस आह्वान का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने देशवासियों से पर्यावरण की रक्षा के लिए अपनी माँ के सम्मान में एक पेड़ लगाने का आग्रह किया था। छत्तीसगढ़, जो अपनी समृद्ध वन संपदा के लिए जाना जाता है, इस दिशा में अब अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इस अभियान का महत्व केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों की सुरक्षा और उनके संवर्धन पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। भेलवाडीह के स्कूल परिसर में छात्रों ने शपथ ली है कि वे न केवल इन पौधों को लगाएंगे, बल्कि उनके बड़े होने तक उनकी देखरेख भी करेंगे। यह कदम जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक जमीनी प्रयास है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर प्रेरणादायक है। प्रवासी भारतीय अक्सर अपनी जड़ों और भारत की प्राकृतिक सुंदरता से जुड़ाव महसूस करते हैं। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में सक्रिय भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समूह भी अक्सर इसी तरह के वृक्षारोपण कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। भारत में इस तरह के बड़े पैमाने पर हो रहे बदलावों की गूँज वैश्विक स्तर पर महसूस की जा रही है, जो यह दर्शाती है कि स्थानीय प्रयास कैसे वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक हो सकते हैं।
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