राजनीति
डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा खुलासा: ईरान पर होने वाली थी बड़ी सैन्य कार्रवाई, राजनयिक दबाव के बाद रुकी अमेरिका की योजना
ICN24 Newsroom 4 अग॰ 2026, 01:37 pm
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू करने के बेहद करीब था, जिसे राजनयिक प्रयासों के चलते अंतिम समय में टाल दिया गया।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचाने वाला एक बड़ा बयान दिया है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका ईरान के खिलाफ एक बड़े स्तर की सैन्य कार्रवाई शुरू करने की कगार पर था, लेकिन अंतिम क्षणों में राजनयिक हस्तक्षेप और कूटनीतिक वार्ताओं के कारण इस हमले को टाल दिया गया। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है और वैश्विक शक्तियां क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
ट्रंप ने इस घटनाक्रम का विवरण साझा करते हुए कहा कि सैन्य तैयारी पूरी हो चुकी थी और लक्ष्य निर्धारित किए जा चुके थे। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण समाधान और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के दबाव ने वाशिंगटन को अपने कदम पीछे खींचने पर मजबूर किया। इस खुलासे ने न केवल अमेरिकी विदेश नीति के रणनीतिक पहलुओं को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि कैसे परदे के पीछे चलने वाली कूटनीति युद्ध जैसी स्थितियों को टालने में सक्षम होती है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों के लिए मध्य पूर्व एक अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। ऑस्ट्रेलिया अपनी ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक मार्गों के लिए इस क्षेत्र की स्थिरता पर निर्भर है, जबकि भारत के लाखों नागरिक खाड़ी देशों में काम करते हैं। यदि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति बनती, तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ता, जिससे ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित होतीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के इस बयान का उद्देश्य उनकी 'शांति के माध्यम से शक्ति' (Strength through Peace) की नीति को बढ़ावा देना है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई विश्लेषकों का तर्क है कि इस तरह के सैन्य तनाव का टलना सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों के लिए राहत की बात है, जिनके परिवार और व्यापारिक हित मध्य पूर्व से गहराई से जुड़े हुए हैं। यह खुलासा यह भी दर्शाता है कि अमेरिका के भीतर सैन्य हस्तक्षेप को लेकर किस तरह का आंतरिक मंथन चलता रहता है।
इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान के प्रति अमेरिकी रुख पर दोबारा बहस छिड़ गई है। जहां एक ओर इसे ट्रंप प्रशासन की संयम बरतने की क्षमता के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ आलोचक इसे अनिश्चित विदेश नीति का हिस्सा मान रहे हैं। वर्तमान में, बाइडेन प्रशासन के तहत भी अमेरिका और ईरान के संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मध्य पूर्व की भू-राजनीति में जोखिम हमेशा बना रहता है।
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