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भोजपुर के राहुल सिंह का 'डबल इनकम' मॉडल: डेयरी के बाद मशरूम उत्पादन से बदली किस्मत, युवाओं के लिए बने प्रेरणा
ICN24 Newsroom 4 अग॰ 2026, 02:37 pm

बिहार के भोजपुर में राहुल सिंह ने डेयरी और मशरूम की खेती को मिलाकर आय का एक नया जरिया तैयार किया है, जिससे उनकी कमाई में भारी इजाफा हुआ है।
बिहार के भोजपुर जिले के एक युवा किसान राहुल सिंह ने कृषि क्षेत्र में नवाचार की एक नई मिसाल पेश की है। पारंपरिक खेती और पशुपालन से हटकर, राहुल ने डेयरी फार्मिंग और मशरूम उत्पादन का एक अनूठा संगम तैयार किया है। इस 'डबल इनकम मॉडल' के जरिए उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधारी है, बल्कि वे अब क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए भी एक मार्गदर्शक बनकर उभरे हैं।
राहुल की सफलता की कहानी उस समय शुरू हुई जब उन्होंने महसूस किया कि केवल डेयरी फार्मिंग से होने वाली आय बढ़ती लागत और बाजार के उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं थी। उन्होंने खेती में विविधता लाने का निर्णय लिया और मशरूम उत्पादन को एक पूरक व्यवसाय के रूप में चुना। मशरूम की खेती की खासियत यह है कि इसके लिए बहुत अधिक जमीन की आवश्यकता नहीं होती और इसे घर के भीतर नियंत्रित वातावरण में किया जा सकता है।
इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता इसका संसाधनों का कुशल प्रबंधन है। डेयरी से मिलने वाले अपशिष्ट का उपयोग खाद के रूप में किया जा सकता है, और मशरूम उत्पादन के बाद बचे हुए अवशेषों का उपयोग भी कृषि कार्यों में किया जाता है। राहुल बताते हैं कि शुरुआत में उन्हें काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन तकनीकी प्रशिक्षण और बाजार की समझ ने उन्हें सफलता की राह दिखाई। आज उनकी कमाई पहले के मुकाबले काफी बढ़ गई है, जिससे वे एक 'एग्री-आंत्रप्रेन्योर' (कृषि उद्यमी) के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं।
राहुल का यह प्रयोग केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित नहीं है। वे अब स्थानीय युवाओं को भी मशरूम उत्पादन और आधुनिक डेयरी प्रबंधन के गुण सिखा रहे हैं। भोजपुर जैसे इलाकों से पलायन एक बड़ी समस्या रही है, ऐसे में राहुल का यह मॉडल साबित करता है कि अगर सही तकनीक और सूझबूझ का इस्तेमाल किया जाए, तो गांवों में रहकर भी शानदार कमाई की जा सकती है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर विशेष महत्व रखती है। प्रवासी भारतीयों का एक बड़ा वर्ग भारत में ग्रामीण विकास और एग्री-टेक (Agri-tech) स्टार्टअप्स में निवेश करने या अपनी पैतृक भूमि पर ऐसे प्रोजेक्ट्स शुरू करने में गहरी रुचि रखता है। राहुल सिंह जैसे सफल उदाहरण यह दर्शाते हैं कि भारतीय कृषि क्षेत्र अब केवल निर्वाह का साधन नहीं, बल्कि एक लाभदायक व्यवसाय बन चुका है। आईएनसी24 (ICN24) से बात करते हुए राहुल ने कहा कि भविष्य में वे अपने उत्पाद की ब्रांडिंग कर उसे बड़े शहरों के बाजारों तक पहुंचाने की योजना बना रहे हैं।
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