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बैंकिंग साक्ष्य विधेयक: डिजिटल युग के लिए कानून में बड़ा बदलाव, 1891 का पुराना कानून हुआ आधुनिक
ICN24 Newsroom 4 अग॰ 2026, 01:37 pm

भारत ने 1891 के औपनिवेशिक काल के कानून को बदलकर नया बैंकिंग साक्ष्य विधेयक पेश किया है, जो डिजिटल रिकॉर्ड को कानूनी मान्यता प्रदान करता है।
भारत सरकार ने बैंकिंग क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कानूनी सुधार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए 'बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल' (Bankers’ Books Evidence Bill) पेश किया है। यह नया कानून 132 साल पुराने, यानी 1891 के 'बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट' की जगह लेगा। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य बैंकिंग रिकॉर्ड्स और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के लिए 'टेक्नोलॉजी-न्यूट्रल' नियम बनाना है, ताकि डिजिटल युग की जरूरतों को कानूनी रूप से पूरा किया जा सके।
पुराना कानून उस दौर में बनाया गया था जब बैंकिंग पूरी तरह से कागजी बही-खातों (ledgers) पर आधारित थी। वर्तमान में, बैंकिंग का अधिकांश हिस्सा सर्वर, क्लाउड स्टोरेज और डिजिटल डेटाबेस पर निर्भर है। पुराने कानून में डिजिटल रिकॉर्ड को साक्ष्य के रूप में पेश करने में कई कानूनी अड़चनें आती थीं, क्योंकि उसमें 'बैंकर्स बुक्स' की परिभाषा सीमित थी। नए विधेयक के तहत, अब किसी भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम में सुरक्षित डेटा, कंप्यूटर प्रिंटआउट और डिजिटल ट्रांजेक्शन लॉग को कानूनी रूप से वैध साक्ष्य माना जाएगा।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले प्रवासी भारतीयों (NRIs) के लिए यह कानून विशेष महत्व रखता है। ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच वित्तीय लेनदेन और निवेश में डिजिटल बैंकिंग का व्यापक उपयोग होता है। कई भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई नागरिक भारत में अपनी संपत्ति, सावधि जमा (FD) और एनआरई/एनआरओ (NRE/NRO) खातों का प्रबंधन डिजिटल माध्यमों से करते हैं। कानून में स्पष्टता आने से अब किसी भी विवाद या कानूनी कार्यवाही की स्थिति में डिजिटल स्क्रीनशॉट, ईमेल रसीदें और बैंक के इलेक्ट्रॉनिक डेटा को न्यायालय में आसानी से साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जा सकेगा। इससे न्याय प्रक्रिया में तेजी आएगी और विदेशों में बैठे निवेशकों का भारतीय बैंकिंग प्रणाली पर भरोसा और मजबूत होगा।
विधेयक में यह भी सुनिश्चित किया गया है कि भविष्य में तकनीक बदलने पर भी कानून प्रभावी रहे। इसीलिए इसे 'टेक्नोलॉजी-न्यूट्रल' रखा गया है, ताकि ब्लॉकचेन या अन्य भविष्य की तकनीकों से उत्पन्न डेटा को भी इसके दायरे में लाया जा सके। सरकार का मानना है कि यह सुधार न केवल बैंकिंग पारदर्शिता बढ़ाएगा, बल्कि वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में अपराधियों को सजा दिलाने में भी सहायक सिद्ध होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम भारत के 'डिजिटल इंडिया' मिशन को कानूनी सुरक्षा कवच प्रदान करता है। अब बैंकों को पुराने कागजी दस्तावेजों को सहेजने के बोझ से मुक्ति मिलेगी और वे पूरी तरह से सुरक्षित डिजिटल आर्काइविंग की ओर बढ़ सकेंगे। भारतीय समुदाय के लिए, जो तकनीक के माध्यम से अपनी मातृभूमि से आर्थिक रूप से जुड़ा हुआ है, यह बिल सुरक्षा और सरलता का एक नया दौर शुरू करेगा।
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