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अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने आईसीई और सीमा सुरक्षा के लिए 70 अरब डॉलर के फंड को दी मंजूरी
ICN24 Newsroom 10 जून 2026, 01:01 pm
अमेरिकी संसद ने आव्रजन और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 70 अरब डॉलर के बजट को पारित किया है, जिससे आईसीई और बॉर्डर पेट्रोल की क्षमताएं बढ़ेंगी।
वाशिंगटन: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) ने आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) और सीमा गश्ती दल (Border Patrol) के संचालन के लिए 70 अरब डॉलर के एक बड़े वित्त पोषण विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण विधायी कदम का उद्देश्य मेक्सिको के साथ लगती दक्षिणी सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करना और आंतरिक आव्रजन कानूनों के प्रवर्तन को मजबूत करना है। सीनेट द्वारा पहले ही इस उपाय को पारित किए जाने के बाद अब यह कानून बनने की दिशा में अंतिम चरण में है।
इस विधेयक का पारित होना राजनीतिक खींचतान के बीच हुआ है। रिपब्लिकन पार्टी ने सीनेट में डेमोक्रेटिक विरोध को दरकिनार करने के लिए एक विशेष प्रक्रिया का उपयोग किया, जिससे वे बिना किसी बड़े बदलाव के इस भारी-भरकम फंड को सुरक्षित करने में सफल रहे। डेमोक्रेट्स ने इस फंड का कड़ा विरोध किया था, क्योंकि उनका मानना है कि वर्तमान में आव्रजन एजेंटों की कार्रवाई और हिरासत केंद्रों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। विपक्ष ने फंड को मंजूरी देने से पहले इसमें सुधारों और जवाबदेही की शर्तों को जोड़ने की मांग की थी, जिसे रिपब्लिकन गुट ने खारिज कर दिया।
इस फंड का एक बड़ा हिस्सा सीमा पर नई तकनीक की तैनाती, अधिक एजेंटों की भर्ती और उन प्रवासियों की निगरानी के लिए खर्च किया जाएगा जो अवैध रूप से देश में प्रवेश करने की कोशिश करते हैं। अमेरिका की आव्रजन नीतियों में होने वाला यह बदलाव वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय है। विशेष रूप से भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय और ऑस्ट्रेलिया में बसे प्रवासियों के लिए यह घटनाक्रम प्रासंगिक है, क्योंकि यह पश्चिमी देशों में आव्रजन और सीमा प्रबंधन के प्रति बढ़ते सख्त रुख को दर्शाता है। ऑस्ट्रेलिया में भी अवैध आव्रजन और मानव तस्करी एक प्रमुख चुनावी मुद्दा रहा है, और अमेरिकी नीतियों का असर अक्सर अन्य सहयोगी देशों की सुरक्षा रणनीतियों पर भी पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फंड के बाद अमेरिका में रह रहे बिना दस्तावेज़ वाले प्रवासियों के खिलाफ छापेमारी और निर्वासन की कार्रवाई तेज हो सकती है। प्रवासी अधिकार समूहों ने चेतावनी दी है कि बिना किसी न्यायिक सुधार या मानवीय सुरक्षा के इतनी बड़ी राशि का आवंटन करने से मानवाधिकारों का उल्लंघन बढ़ सकता है। हालांकि, समर्थकों का तर्क है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता बनाए रखने के लिए सीमा पर सुरक्षा बलों को आधुनिक उपकरणों और पर्याप्त संसाधनों से लैस करना समय की मांग है।
यह घटनाक्रम न केवल अमेरिका की घरेलू राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शरणार्थी संकट और वीजा नीतियों पर भी असर डाल सकता है। भारतीय समुदाय, जो दुनिया भर में सबसे बड़े प्रवासियों में से एक है, इन बदलावों को बारीकी से देख रहा है, क्योंकि अमेरिका की सख्ती अक्सर अन्य विकसित देशों के लिए एक मानक बन जाती है।
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