राजनीति
उत्तर प्रदेश में हड़ताल पर पाबंदी: योगी सरकार ने 6 महीने के लिए लागू किया एस्मा (ESMA)
ICN24 Newsroom 6 जुल॰ 2026, 09:31 pm
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में अनिवार्य सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू कर दिया है, जिससे अगले छह महीनों तक किसी भी सरकारी विभाग में हड़ताल पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। सरकार ने राज्य में 'अनिवार्य सेवा अनुरक्षण अधिनियम' (ESMA) लागू कर दिया है। इस अधिसूचना के जारी होने के बाद, अगले छह महीनों तक उत्तर प्रदेश के किसी भी सरकारी विभाग, निगम या प्राधिकरण में कर्मचारियों द्वारा की जाने वाली किसी भी प्रकार की हड़ताल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
राज्य सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह निर्णय जनहित को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सरकार का मानना है कि अनिवार्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की बाधा आने से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। विशेष रूप से स्वास्थ्य, परिवहन, बिजली और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हड़ताल से जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। राज्यपाल की अनुमति के बाद अपर मुख्य सचिव ने इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिया है।
एस्मा (ESMA) एक ऐसा कानून है जिसका उपयोग सरकारें तब करती हैं जब उन्हें लगता है कि हड़ताल के कारण आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति रुक सकती है। उत्तर प्रदेश में इस कानून के लागू होने का सीधा अर्थ यह है कि अब कोई भी सरकारी कर्मचारी संगठन विरोध प्रदर्शन के नाम पर काम नहीं रोक सकेगा। यदि कोई कर्मचारी या संगठन इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो पुलिस बिना वारंट के उन्हें गिरफ्तार कर सकती है और इसमें सजा व जुर्माने का भी कड़ा प्रावधान है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेषकर उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है। यूपी भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है और वहां की प्रशासनिक स्थिरता का सीधा असर विकास कार्यों और निवेश पर पड़ता है। कई अनिवासी भारतीय (NRIs) जो राज्य में रियल एस्टेट, कृषि या स्टार्टअप में निवेश कर चुके हैं, उनके लिए सेवाओं का सुचारू रूप से चलना अनिवार्य है। इसके अलावा, छुट्टियों में घर जाने वाले प्रवासियों के लिए परिवहन और सुरक्षा सेवाओं की उपलब्धता भी इस तरह के निर्णयों पर निर्भर करती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार ने यह कदम आगामी चुनौतियों और प्रशासनिक सुदृढ़ता को सुनिश्चित करने के लिए उठाया है। पिछले कुछ समय में विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा अपनी मांगों को लेकर आंदोलन की सुगबुगाहट देखी गई थी। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि संवाद के रास्ते खुले हैं, लेकिन जनता की सेवा में किसी भी तरह की कोताही या बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले समय में यह देखना होगा कि कर्मचारी संगठन इस पाबंदी पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
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