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AICTE का बड़ा फैसला: भारत में 2025-26 सत्र के लिए बंद होंगे 58 इंजीनियरिंग और तकनीकी कॉलेज

ICN24 Newsroom 6 जुल॰ 2026, 07:31 pm
AICTE का बड़ा फैसला: भारत में 2025-26 सत्र के लिए बंद होंगे 58 इंजीनियरिंग और तकनीकी कॉलेज

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने घटते नामांकन और गुणवत्ता मानकों के कारण 58 तकनीकी संस्थानों को बंद करने की मंजूरी दे दी है।

भारत में तकनीकी शिक्षा की नियामक संस्था, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए देशभर के 58 इंजीनियरिंग और तकनीकी कॉलेजों को बंद करने का निर्णय लिया है। यह कदम देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने और मांग-आपूर्ति के असंतुलन को ठीक करने के प्रयासों के तहत देखा जा रहा है। बंद होने वाले संस्थानों में इंजीनियरिंग, प्रबंधन और अन्य तकनीकी पाठ्यक्रम शामिल हैं, जो अब नए छात्रों का नामांकन नहीं कर पाएंगे। AICTE के आंकड़ों के अनुसार, इन संस्थानों को बंद करने का मुख्य कारण छात्रों के नामांकन में लगातार आ रही गिरावट और बुनियादी ढांचे की कमी है। पिछले कुछ वर्षों में, कई निजी कॉलेजों में सीटें खाली रह रही थीं, जिससे इन संस्थानों का संचालन आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं रह गया था। इसके अतिरिक्त, कई कॉलेज राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (NBA) के कड़े गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में भी विफल रहे हैं। इस विकास का असर केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में बसे प्रवासी भारतीयों पर भी पड़ेगा। ऑस्ट्रेलियाई-भारतीय समुदाय के कई लोग अपने बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए भारतीय संस्थानों के साथ जुड़े रहते हैं या शिक्षा सलाहकार (Education Consultants) के रूप में कार्य करते हैं। कॉलेजों के बंद होने से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि अब भारत में 'मात्रा' के बजाय 'गुणवत्ता' पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह छंटनी भारतीय इंजीनियरिंग डिग्री की वैश्विक साख को बढ़ाने में मदद करेगी। जब कमजोर प्रदर्शन करने वाले संस्थान बंद होते हैं, तो संसाधनों का केंद्र बेहतर संस्थानों की ओर स्थानांतरित हो जाता है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे उन पेशेवरों के लिए जो भारत के साथ तकनीकी विनिमय कार्यक्रम (Exchange Programs) चलाते हैं, यह सूचना महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें अब अधिक विश्वसनीय और प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ साझेदारी करने का अवसर मिलेगा। AICTE ने स्पष्ट किया है कि जो छात्र इन संस्थानों में पहले से नामांकित हैं, उनकी पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। संबंधित विश्वविद्यालयों और राज्य सरकारों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन छात्रों का स्थानांतरण अन्य मान्यता प्राप्त कॉलेजों में सुनिश्चित करें। परिषद ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में केवल उन्हीं नए संस्थानों को अनुमति दी जाएगी जो उभरती हुई तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस और रोबोटिक्स में विशेषज्ञता रखते हों। यह निर्णय भारत की 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020' के अनुरूप है, जो उच्च शिक्षा के युक्तिकरण और अंतरराष्ट्रीयकरण पर जोर देती है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए, यह भारत में शिक्षा क्षेत्र में हो रहे बड़े बदलावों का एक संकेत है, जो अंततः दोनों देशों के बीच शैक्षिक और पेशेवर संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
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