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ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुट दिल्ली पहुंचे; चुनाव आयोग तय करेगा कौन है 'असली TMC'

ICN24 Newsroom 6 जुल॰ 2026, 10:31 pm
ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुट दिल्ली पहुंचे; चुनाव आयोग तय करेगा कौन है 'असली TMC'

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में वर्चस्व की लड़ाई अब दिल्ली पहुंच गई है, जहां ममता और ऋतब्रत बनर्जी के गुट चुनाव आयोग के समक्ष पार्टी के नाम और प्रतीक पर अपना दावा पेश करेंगे।

नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहा नेतृत्व का संघर्ष अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पार्टी के दो धड़े—एक का नेतृत्व ममता बनर्जी और दूसरे का ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं—सोमवार को देश की राजधानी दिल्ली पहुंचे। दोनों गुट भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के समक्ष अपनी-अपनी दलीलें पेश करेंगे कि आखिर 'असली TMC' कौन है और पार्टी के नाम व आधिकारिक चुनाव चिह्न 'जोड़ा फूल' पर किसका अधिकार होना चाहिए। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को बंगाल की राजनीति के एक युग के अंत और नई गुटबाजी की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। हालिया विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद से ही आंतरिक मतभेद उभरने लगे थे। ऋतब्रत बनर्जी गुट का आरोप है कि पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी की गई, जबकि ममता बनर्जी के समर्थकों का कहना है कि यह केवल कुछ असंतुष्ट नेताओं की महत्वाकांक्षा का परिणाम है। निर्वाचन सदन में होने वाली यह सुनवाई काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनाव आयोग को अब यह तय करना होगा कि पार्टी के निर्वाचित प्रतिनिधियों और संगठनात्मक विंग में किसके पास बहुमत है। यह मामला बिल्कुल वैसा ही रूप ले चुका है जैसा हाल के वर्षों में महाराष्ट्र में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विभाजन के दौरान देखा गया था। दोनों ही पक्ष अपने साथ विधायकों, सांसदों और जिला स्तर के पदाधिकारियों का समर्थन होने का दावा कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेषकर बंगाली प्रवासियों के बीच भी इस खबर को लेकर काफी हलचल है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे प्रवासी भारतीय, जो बंगाल की राजनीति और वहां के विकास कार्यों में गहरी रुचि रखते हैं, इस विभाजन को चिंता की दृष्टि से देख रहे हैं। प्रवासी विशेषज्ञों का मानना है कि पार्टी की इस आंतरिक कलह का सीधा असर पश्चिम बंगाल के भविष्य के शासन और राज्य के राजनीतिक संतुलन पर पड़ेगा। आगामी कुछ दिनों में चुनाव आयोग दोनों पक्षों द्वारा जमा किए गए हलफनामों और दस्तावेजों की जांच करेगा। यदि कोई गुट स्पष्ट बहुमत साबित नहीं कर पाता है, तो आयोग पार्टी के नाम और चिह्न को 'फ्रीज' भी कर सकता है, जिससे दोनों गुटों को नए नाम के साथ चुनावी मैदान में उतरना पड़ सकता है। फिलहाल, पूरी बंगाल की राजनीति और दिल्ली के सत्ता केंद्रों की नजरें चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं।
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