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ब्रिटेन ने जब्त किया रूसी टैंकर: पुतिन के करीबी ने कीर स्टारमर पर साधा निशाना, लगाया बड़ा आरोप
ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 03:01 am

ब्रिटिश सेना द्वारा एक प्रतिबंधित रूसी टैंकर को जब्त किए जाने के बाद रूस और ब्रिटेन के बीच राजनयिक तनाव चरम पर पहुंच गया है।
लंदन और मॉस्को के बीच कूटनीतिक तनाव एक बार फिर गहरा गया है। ब्रिटिश रॉयल मरीन कमांडो और कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने इंग्लिश चैनल में एक प्रतिबंधित रूसी टैंकर को जब्त करने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया। इस कार्रवाई को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने रूस की 'शैडो फ्लीट' (गुप्त बेड़े) के खिलाफ एक बड़ी सफलता बताया है। ब्रिटिश सरकार का तर्क है कि यह टैंकर यूक्रेन के खिलाफ चल रहे युद्ध के लिए धन जुटाने का एक जरिया था।
प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने इस ऑपरेशन की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम पुतिन के युद्ध तंत्र की कमर तोड़ने के लिए आवश्यक था। हालांकि, इस कार्रवाई ने रूस के भीतर तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। व्लादिमीर पुतिन के विशेष दूत और रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष के प्रमुख किरिल दिमित्रीव ने स्टारमर पर सीधा हमला बोला है। दिमित्रीव ने आरोप लगाया कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री अपनी घरेलू विफलताओं, विशेष रूप से देश में बढ़ते आप्रवासन (Immigration) संकट और दंगों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के आक्रामक कदम उठा रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम वैश्विक भू-राजनीति और आर्थिक स्थिरता के लिहाज से महत्वपूर्ण है। रूस और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा की कीमतों को प्रभावित कर सकता है, जिसका सीधा असर ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इसके अलावा, आप्रवासन का मुद्दा, जिस पर रूसी दूत ने स्टारमर को घेरा है, भारतीय प्रवासियों के लिए भी एक संवेदनशील विषय है, क्योंकि ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया दोनों देशों में शरणार्थियों और कार्य वीजा को लेकर बहस तेज है।
रूसी अधिकारियों का दावा है कि ब्रिटेन में हाल के हफ्तों में प्रवासियों के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शनों ने स्टारमर सरकार को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है। दिमित्रीव ने अपने बयान में कहा कि ब्रिटिश नेतृत्व अपनी गिरती लोकप्रियता को बचाने के लिए रूस को एक 'बाहरी दुश्मन' के रूप में पेश कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इस तरह की 'समुद्री डकैती' जैसी कार्रवाइयों के गंभीर परिणाम होंगे।
फिलहाल, टैंकर को जांच के लिए हिरासत में रखा गया है और ब्रिटिश अधिकारी इसके दस्तावेजों और कार्गो की बारीकी से जांच कर रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यूक्रेन युद्ध का मैदान केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अब दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक रास्तों तक फैल चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या रूस इस कार्रवाई के जवाब में कोई जवाबी कदम उठाता है या नहीं।
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