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ट्रम्प प्रशासन की सख्ती: अमेरिकी वित्त विभाग ने बैंकों को अवैध प्रवासियों से जुड़े संदिग्ध लेन-देन पर नज़र रखने के निर्देश दिए

ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 06:00 am
ट्रम्प प्रशासन की सख्ती: अमेरिकी वित्त विभाग ने बैंकों को अवैध प्रवासियों से जुड़े संदिग्ध लेन-देन पर नज़र रखने के निर्देश दिए

अमेरिकी वित्त विभाग की वित्तीय अपराध इकाई ने बैंकों को पहचान की चोरी और कर धोखाधड़ी से जुड़े संदिग्ध लेन-देन की निगरानी करने का आदेश दिया है।

वाशिंगटन: अमेरिका में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यभार संभालने से पहले ही आव्रजन नियमों को कड़ा करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। अमेरिकी वित्त विभाग की वित्तीय अपराध प्रवर्तन इकाई (FinCEN) ने बैंकिंग संस्थानों को एक विशेष परामर्श जारी किया है। इसमें बैंकों से उन संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों पर कड़ी नज़र रखने को कहा गया है जो अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों से जुड़ी हो सकती हैं। इस नए निर्देश के तहत बैंकों को विशेष रूप से पहचान की चोरी (identity theft), पेरोल टैक्स धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों की पहचान करने के लिए कहा गया है। विभाग का मानना है कि अवैध रूप से काम करने वाले लोग अक्सर जाली दस्तावेजों का उपयोग कर वित्तीय प्रणाली में प्रवेश करते हैं, जिससे न केवल सुरक्षा को खतरा होता है बल्कि राजस्व का भी नुकसान होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम ट्रम्प प्रशासन के व्यापक आव्रजन सुधार एजेंडे का हिस्सा है। ट्रम्प ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान बार-बार दोहराया था कि वह सत्ता में आते ही देश के इतिहास का सबसे बड़ा निर्वासन (deportation) अभियान शुरू करेंगे। बैंकों को दिया गया यह निर्देश इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि वित्तीय रिकॉर्ड के जरिए उन लोगों तक पहुंचना आसान होगा जो कानूनी दायरे से बाहर रह रहे हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए भी इस खबर के गहरे मायने हैं। हालांकि यह नियम सीधे तौर पर ऑस्ट्रेलिया पर लागू नहीं होते, लेकिन अमेरिका की आव्रजन नीतियों का वैश्विक असर पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया में भी हाल के महीनों में 'वीजा नियमों के उल्लंघन' और 'छात्र वीजा' पर सख्ती देखी गई है। अमेरिका में वित्तीय संस्थानों की इस सक्रियता से अन्य पश्चिमी देश भी प्रेरणा ले सकते हैं, जिससे भविष्य में वहां रह रहे अप्रवासियों के लिए बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। वित्त विभाग के इस कदम की मानवाधिकार समूहों ने आलोचना भी शुरू कर दी है। उनका तर्क है कि इससे उन समुदायों को बैंकिंग सेवाओं से वंचित किया जा सकता है जो वास्तव में वैध प्रक्रिया का हिस्सा बनने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह केवल कानून प्रवर्तन और वित्तीय अखंडता को बनाए रखने का एक प्रयास है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिकी बैंक इस निर्देश को कैसे लागू करते हैं और इसका उन भारतीय पेशेवरों और छात्रों पर क्या प्रभाव पड़ता है जो अमेरिका में अपने भविष्य की योजना बना रहे हैं। फिलहाल, यह स्पष्ट है कि अमेरिका में अवैध आव्रजन के खिलाफ लड़ाई अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अब सीधे तौर पर वित्तीय प्रणाली के जरिए लड़ी जा रही है।
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