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ट्रम्प प्रशासन का बड़ा फैसला: $750 के अतिरिक्त शुल्क पर मिलेगी 'प्रीमियम' वीजा इंटरव्यू की सुविधा
ICN24 Newsroom 9 जून 2026, 08:30 am
अमेरिकी विदेश विभाग ने बिजनेस और टूरिस्ट वीजा के लिए एक नई प्रीमियम सेवा की घोषणा की है, जिसके तहत $750 का भुगतान कर जल्द अपॉइंटमेंट लिया जा सकेगा।
वॉशिंगटन और सिडनी: डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा करने के इच्छुक विदेशी नागरिकों के लिए एक नई 'प्रीमियम' वीजा सेवा शुरू करने की घोषणा की है। इस नई पहल के तहत, जो यात्री बिजनेस (B-1) या टूरिस्ट (B-2) वीजा के लिए आवेदन कर रहे हैं, वे $750 (लगभग 63,000 भारतीय रुपये) का अतिरिक्त शुल्क देकर त्वरित इंटरव्यू स्लॉट प्राप्त कर सकेंगे। यह शुल्क वर्तमान में लागू $185 के मानक आवेदन शुल्क के अतिरिक्त होगा।
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, यह सेवा वर्तमान में चुनिंदा दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में उपलब्ध कराई जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य उन यात्रियों को राहत देना है जिन्हें आपातकालीन या व्यावसायिक कारणों से जल्द अमेरिका पहुंचना है, लेकिन लंबे वेटिंग पीरियड के कारण उन्हें अपॉइंटमेंट नहीं मिल पा रहा है। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में अमेरिकी वीजा के लिए प्रतीक्षा समय (वेटिंग टाइम) एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले कई भारतीय मूल के नागरिक अक्सर पारिवारिक कार्यक्रमों या व्यावसायिक सम्मेलनों के लिए अमेरिका की यात्रा करते हैं। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों पर अक्सर काम का भारी दबाव रहता है। इस नई सशुल्क सेवा से उन संपन्न यात्रियों को सुविधा होगी जो समय बचाने के लिए प्रीमियम भुगतान करने के इच्छुक हैं। हालांकि, आलोचकों का तर्क है कि यह व्यवस्था वीजा प्रक्रिया में 'अमीर और गरीब' के बीच की खाई को बढ़ा सकती है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि $750 का यह शुल्क केवल इंटरव्यू को जल्दी शेड्यूल करने के लिए है, यह वीजा की मंजूरी की गारंटी नहीं देता है। आवेदकों को अभी भी सुरक्षा जांच और पात्रता के कड़े मानकों को पूरा करना होगा। विदेश विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि इस अतिरिक्त राजस्व का उपयोग दूतावासों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने और तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए किया जा सकता है, जिससे भविष्य में सामान्य आवेदकों के लिए भी प्रतीक्षा समय कम हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प प्रशासन का यह कदम 'उपयोगकर्ता-भुगतान' मॉडल पर आधारित है। जहां एक ओर यह उन लोगों के लिए एक वरदान साबित हो सकता है जिन्हें तत्काल यात्रा की आवश्यकता है, वहीं दूसरी ओर मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह एक बड़ा आर्थिक बोझ बन सकता है। भारतीय समुदाय के जो लोग ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका जाने की योजना बना रहे हैं, उन्हें अब अपनी यात्रा की लागत और समय के बीच चुनाव करना होगा। आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि ऑस्ट्रेलिया स्थित अमेरिकी केंद्रों पर इस सुविधा को कब से पूरी तरह लागू किया जाएगा।
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