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जाप माला में 108 दाने ही क्यों होते हैं? जानें शास्त्रों और विज्ञान में छिपा इसका गहरा महत्व
ICN24 Newsroom 12 जुल॰ 2026, 06:31 pm
सनातन धर्म में 108 की संख्या को अत्यंत पवित्र माना गया है। जानिए कैसे यह संख्या खगोल विज्ञान, ज्योतिष और आध्यात्मिक साधना से गहराई से जुड़ी हुई है।
सिडनी से मेलबर्न और पर्थ तक, ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के घरों में अक्सर भगवान की मूर्तियों के पास 108 दानों वाली जाप माला देखी जा सकती है। चाहे वह रुद्राक्ष की माला हो या तुलसी की, मनकों की यह विशेष संख्या महज एक परंपरा नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक तर्क छिपा है। सनातन धर्म में किसी भी मंत्र का 108 बार जाप करना पूर्ण फलदायी माना गया है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह संख्या 108 ही क्यों है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्मांड और मानव शरीर के बीच एक गहरा संबंध है। भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुल 27 नक्षत्र होते हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं। यदि हम 27 को 4 से गुणा करें, तो परिणाम 108 आता है। इसी तरह, ज्योतिष में 12 राशियां और 9 ग्रह माने गए हैं। 12 राशियों और 9 ग्रहों का गुणनफल भी 108 ही होता है। इसलिए, जब कोई व्यक्ति माला के 108 मोतियों पर मंत्र का जाप करता है, तो माना जाता है कि वह प्रतीकात्मक रूप से पूरे ब्रह्मांड की ऊर्जा के साथ जुड़ रहा है।
खगोलीय दृष्टि से भी 108 की संख्या का महत्व चौंकाने वाला है। प्राचीन भारतीय ऋषियों को खगोल विज्ञान का गहरा ज्ञान था। आधुनिक विज्ञान भी इस बात की पुष्टि करता है कि सूर्य का व्यास पृथ्वी के व्यास से लगभग 108 गुना अधिक है। साथ ही, पृथ्वी से सूर्य की दूरी सूर्य के व्यास की 108 गुना है, और यही अनुपात चंद्रमा और पृथ्वी के बीच की दूरी पर भी लागू होता है। यह दर्शाता है कि 108 की संख्या हमारे सौर मंडल की संरचना का एक आधार है।
आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, हमारे शरीर में 108 मुख्य ऊर्जा केंद्र या 'नाड़ियां' मानी गई हैं जो हृदय चक्र से जुड़ी हैं। माला फेरते समय जब हम 108 बार मंत्रोच्चार करते हैं, तो यह इन ऊर्जा केंद्रों को सक्रिय करने और मन को एकाग्र करने में मदद करता है। ऑस्ट्रेलिया के व्यस्त जीवन में, जहाँ काम का तनाव और मानसिक शांति की खोज एक बड़ी चुनौती है, वहां कई प्रवासी भारतीय इस प्राचीन पद्धति को मानसिक स्वास्थ्य और 'माइंडफुलनेस' के लिए अपना रहे हैं।
माला में एक अतिरिक्त बड़ा दाना भी होता है जिसे 'सुमेरु' कहा जाता है। जाप करते समय इसे पार नहीं किया जाता, बल्कि यहाँ पहुँचने पर माला पलट ली जाती है। सुमेरु हमें ब्रह्मांड के केंद्र और ईश्वर के प्रति सम्मान की याद दिलाता है। आयुर्वेद में भी 108 'मर्म' बिंदुओं का उल्लेख है, जो स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस प्रकार, जाप माला के ये 108 दाने धर्म, विज्ञान और स्वास्थ्य का एक अद्भुत संगम हैं, जो सदियों से भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बने हुए हैं।
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