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भगवान जगन्नाथ मंदिर का रहस्य: क्यों वर्जित है मंदिर परिसर में शंख बजाना? जानिए इस सदियों पुरानी परंपरा के पीछे की कथा
ICN24 Newsroom 13 जुल॰ 2026, 10:31 pm

पुरी के जगन्नाथ मंदिर में शंख न बजाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। जानिए इसके पीछे की पौराणिक मान्यताओं और माता लक्ष्मी से जुड़े रोचक तथ्यों को।
ओडिशा के पुरी में स्थित महाप्रभु जगन्नाथ का मंदिर न केवल करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है, बल्कि यह अपने अनसुलझे रहस्यों के लिए भी दुनिया भर में प्रसिद्ध है। हिंदू धर्म में किसी भी पूजा, आरती या मांगलिक कार्य की शुरुआत शंखनाद के बिना अधूरी मानी जाती है। शंख की ध्वनि को नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाला और पवित्रता का प्रतीक माना गया है। हालांकि, जगन्नाथ मंदिर के भीतर शंख बजाना पूरी तरह से वर्जित है। यह एक ऐसी परंपरा है जो सदियों से चली आ रही है और इसके पीछे कई गहरा धार्मिक और पौराणिक महत्व छिपा है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, शंख को देवी लक्ष्मी का भाई माना जाता है क्योंकि दोनों की उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान समुद्र से हुई थी। चूंकि भगवान जगन्नाथ स्वयं विष्णु के अवतार हैं और माता लक्ष्मी उनकी अर्धांगिनी हैं, इसलिए मंदिर की परंपराओं के अनुसार, अपने ही घर में अपने भाई (शंख) को बजाना या उसे कष्ट देना उचित नहीं माना जाता। मान्यताओं के अनुसार, भगवान जगन्नाथ मंदिर के भीतर एकांत और शांति में रहना पसंद करते हैं, और शंख की तीव्र ध्वनि उनके ध्यान या विश्राम में बाधा डाल सकती है।
एक अन्य प्रचलित कथा के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने शंखासुर नामक दैत्य का वध किया था, तो उन्होंने उसके अवशेषों से बने पांचजन्य शंख को धारण किया था। लेकिन पुरी के इस विशेष धाम में, भगवान अपनी मानवीय लीलाओं के रूप में विराजमान हैं। यहाँ वे एक राजा के रूप में नहीं, बल्कि भक्तों के प्रिय 'जगन्नाथ' के रूप में हैं। मंदिर के पुजारियों का कहना है कि मंदिर के गर्भगृह में प्राकृतिक रूप से एक मौन व्याप्त रहता है, जिसे 'अनहद नाद' कहा जाता है। इस दिव्य शांति को बनाए रखने के लिए बाहरी ध्वनियों, विशेषकर शंख की ध्वनि को वर्जित रखा गया है।
दिलचस्प बात यह है कि पुरी का मंदिर समुद्र के किनारे स्थित है, लेकिन जैसे ही आप मंदिर के 'सिंह द्वार' के भीतर कदम रखते हैं, आपको लहरों की आवाज सुनाई देनी बंद हो जाती है। इसे भी शंख न बजाने के तर्क से जोड़कर देखा जाता है कि यहाँ की ध्वनिक संरचना (Acoustics) अलौकिक है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी जगन्नाथ मंदिर का विशेष महत्व है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले ओडिया और व्यापक हिंदू समुदाय हर साल धूमधाम से रथ यात्रा का आयोजन करते हैं। सिडनी के रॉकडेल और मेलबर्न के उपनगरों में आयोजित होने वाली रथ यात्राओं में हजारों प्रवासी भारतीय भाग लेते हैं। ऑस्ट्रेलिया में बसने के बावजूद, भारतीय समुदाय अपनी जड़ों और पुरी की इन अनूठी परंपराओं के प्रति गहरी श्रद्धा रखता है। मंदिर के ये रहस्य न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भी जोड़ते हैं।
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