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अमेरिका में 'रेड-ग्रीन एलायंस' का उदय: वामपंथी और इस्लामवादी राजनीति के बीच बढ़ते समन्वय का विश्लेषण

ICN24 Newsroom 3 जुल॰ 2026, 12:31 am
अमेरिका में 'रेड-ग्रीन एलायंस' का उदय: वामपंथी और इस्लामवादी राजनीति के बीच बढ़ते समन्वय का विश्लेषण

अमेरिका में कट्टरपंथी वामपंथियों और इस्लामवादी गुटों के बीच बढ़ते सहयोग, जिसे 'रेड-ग्रीन एलायंस' कहा जा रहा है, ने वैश्विक राजनीति और भारतीय प्रवासियों के बीच नई बहस छेड़ दी है।

संयुक्त राज्य अमेरिका के समकालीन राजनीतिक परिदृश्य में एक अनोखा और विवादास्पद वैचारिक गठबंधन उभर कर सामने आया है, जिसे विश्लेषक 'रेड-ग्रीन एलायंस' या 'रेड-ग्रीन एक्सिस' के रूप में पहचान रहे हैं। यह गठबंधन वैचारिक रूप से धुर विरोधी समूहों—कट्टरपंथी वामपंथियों (समाजवादी और प्रगतिशील) और राजनीतिक इस्लामवादियों—के बीच एक रणनीतिक तालमेल को दर्शाता है। यद्यपि इन दोनों समूहों के सामाजिक और धार्मिक मूल्य एक-दूसरे के विपरीत हैं, फिर भी साझा राजनीतिक लक्ष्यों और सत्ता-विरोधी भावनाओं ने इन्हें एक मंच पर ला खड़ा किया है। 'रेड' (लाल) शब्द यहां मार्क्सवादी, समाजवादी और कट्टर वामपंथी विचारधाराओं का प्रतिनिधित्व करता है, जो पारंपरिक रूप से धर्मनिरपेक्षता और उदारवादी मूल्यों के पक्षधर रहे हैं। वहीं 'ग्रीन' (हरा) शब्द राजनीतिक इस्लाम और उससे जुड़ी विचारधाराओं का प्रतीक है। पहली नजर में यह गठबंधन असंभव प्रतीत होता है क्योंकि वामपंथी विचारधारा अक्सर धर्म को व्यक्तिगत मामला मानती है या उसका विरोध करती है, जबकि इस्लामवादी राजनीति धर्म को शासन और समाज का आधार बनाने पर जोर देती है। हालांकि, अमेरिका में हाल के वर्षों में फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनों और इजरायल-विरोधी आंदोलनों के दौरान इन दोनों धड़ों को कंधे से कंधा मिलाकर चलते देखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस गठबंधन का मुख्य आधार 'साझा शत्रु' की अवधारणा है। दोनों ही समूह पश्चिमी उदारवादी लोकतंत्र, पूंजीवाद और वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक ढांचे को चुनौती देना चाहते हैं। वामपंथी इसे 'साम्राज्यवाद' के खिलाफ लड़ाई मानते हैं, जबकि इस्लामवादी इसे अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को स्थापित करने के अवसर के रूप में देखते हैं। अमेरिका के विश्वविद्यालयों और प्रमुख शहरों में होने वाले विरोध प्रदर्शनों में यह तालमेल स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जहाँ प्रगतिशील कार्यकर्ता और धार्मिक रूढ़िवादी एक ही नारे लगाते नजर आते हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम अत्यधिक महत्वपूर्ण है। अमेरिका में होने वाले राजनीतिक बदलाव अक्सर अन्य पश्चिमी देशों, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में भी दिखाई देते हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय, जो मुख्य रूप से लोकतांत्रिक मूल्यों और आर्थिक स्थिरता का पक्षधर है, इस गठबंधन को एक उभरती हुई चुनौती के रूप में देखता है। विशेष रूप से, जब यह गठबंधन कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भारत-विरोधी रुख अपनाता है, तो भारतीय प्रवासियों की चिंताएं और बढ़ जाती हैं। आलोचकों का तर्क है कि 'रेड-ग्रीन एलायंस' दीर्घकालिक रूप से समाज में ध्रुवीकरण बढ़ा सकता है। जहाँ एक ओर यह गठबंधन मानवाधिकारों और सामाजिक न्याय की बात करता है, वहीं दूसरी ओर इसके भीतर मौजूद कट्टरपंथी तत्व अक्सर लोकतांत्रिक संस्थानों के लिए खतरा पैदा करते हैं। भारतीय मूल के लोगों के लिए, जो ऑस्ट्रेलिया की राजनीति में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं, इस नए राजनीतिक समीकरण को समझना आवश्यक है ताकि वे अपनी सामुदायिक सुरक्षा और हितों की रक्षा कर सकें। अंततः, यह गठबंधन इस बात का प्रमाण है कि राजनीति में विचारधारा से अधिक रणनीतिक हित मायने रखते हैं।
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