राजनीति
श्रीपेरंबदूर का उदय: कैसे बना यह कस्बा वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का नया केंद्र
ICN24 Newsroom 13 जुल॰ 2026, 10:31 am
चेन्नई के निकट स्थित श्रीपेरंबदूर भारत के 20 अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात का नेतृत्व कर रहा है, जो इसे एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करता है।
चेन्नई के बाहरी इलाके में स्थित श्रीपेरंबदूर, जो कभी अपने शांत वातावरण और मंदिरों के लिए जाना जाता था, आज वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण की दुनिया में एक बड़ा नाम बन चुका है। भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में आई हालिया तेजी में इस क्षेत्र की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है। वित्त वर्ष 2023-24 में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 20 बिलियन डॉलर के पार पहुँच गया, जिसमें अकेले तमिलनाडु की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से अधिक रही। इस सफलता के केंद्र में श्रीपेरंबदूर का वह एकीकृत विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र (integrated manufacturing ecosystem) है, जो दुनिया भर की दिग्गज कंपनियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।
इस औद्योगिक क्रांति की शुरुआत तब हुई जब दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों ने 'चीन प्लस वन' रणनीति के तहत अपने उत्पादन केंद्रों में विविधता लाने का फैसला किया। श्रीपेरंबदूर में फॉक्सकॉन (Foxconn), पेगाट्रॉन (Pegatron) और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी कंपनियों की मौजूदगी ने इसे 'भारत का शेनझेन' बनाने की दिशा में अग्रसर किया है। यहाँ न केवल स्मार्टफोन्स की असेंबलिंग हो रही है, बल्कि पुर्जों के निर्माण और लॉजिस्टिक्स का एक जाल भी तैयार किया गया है। तमिलनाडु सरकार की नीतियों और बुनियादी ढांचे में किए गए निवेश ने इस बदलाव को गति दी है, जिससे यह क्षेत्र विदेशी निवेशकों की पहली पसंद बन गया है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह विकास विशेष महत्व रखता है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (ECTA) के लागू होने के बाद, दोनों देशों के बीच तकनीकी और औद्योगिक संबंधों में मजबूती आई है। श्रीपेरंबदूर जैसे केंद्रों की सफलता से यह सुनिश्चित होता है कि ऑस्ट्रेलिया को मिलने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला में भारत एक विश्वसनीय साझेदार बन रहा है। इससे न केवल भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय मूल के पेशेवरों और उद्यमियों के लिए भी व्यापार और निवेश के नए अवसर खुल रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि श्रीपेरंबदूर की सफलता का राज इसकी 'एकीकृत क्लस्टर' व्यवस्था में छिपा है। यहाँ कच्चे माल की उपलब्धता से लेकर तैयार माल के निर्यात के लिए बंदरगाहों तक की सुगम पहुँच उपलब्ध है। साथ ही, स्थानीय कार्यबल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी व्यापक बदलाव लाया है। आने वाले वर्षों में, यदि इसी गति से बुनियादी ढांचे का विस्तार होता रहा, तो श्रीपेरंबदूर न केवल भारत बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के इलेक्ट्रॉनिक्स परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखता है। यह भारत के 'मेक इन इंडिया' अभियान की एक ऐसी सफलता की कहानी है जो वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को एक विनिर्माण महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रही है।
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