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आगरा: बुलंद दरवाजा पर रोपवे और ताजमहल में सेल्फी पॉइंट का प्रस्ताव निरस्त, विरासत संरक्षण को प्राथमिकता
ICN24 Newsroom 13 जुल॰ 2026, 09:31 am

आगरा के ऐतिहासिक स्मारकों के आधुनिकीकरण की योजनाओं को झटका लगा है। बुलंद दरवाजा पर रोपवे और ताजमहल में सेल्फी पॉइंट बनाने के प्रस्तावों को सुरक्षा और विरासत मानकों के चलते रद्द कर दिया गया है।
उत्तर प्रदेश के आगरा में ऐतिहासिक स्मारकों के स्वरूप और उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने दो बड़े प्रस्तावों को निरस्त कर दिया है। विश्व प्रसिद्ध ताजमहल में प्रस्तावित चार सेल्फी पॉइंट और फतेहपुर सीकरी स्थित बुलंद दरवाजा पर रोपवे (Ropeway) बनाने की योजना पर अब विराम लग गया है। यह निर्णय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और स्थानीय प्रशासन की समीक्षा बैठक के बाद लिया गया है, जिसमें विरासत के मूल स्वरूप को बनाए रखने पर जोर दिया गया।
फतेहपुर सीकरी में पर्यटकों की सुविधा के लिए बुलंद दरवाजा तक रोपवे बनाने का प्रस्ताव लंबे समय से चर्चा में था। इसका मुख्य उद्देश्य बुजुर्गों और दिव्यांगों को ऊंचाई पर स्थित इस स्मारक तक आसानी से पहुंचाना था। हालांकि, विशेषज्ञों और संरक्षणवादियों ने चिंता जताई थी कि रोपवे के निर्माण से स्मारक के दृश्य सौंदर्य (Visual Integrity) पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। इसके अतिरिक्त, निर्माण कार्य के दौरान ऐतिहासिक ढांचे को होने वाले संभावित खतरों को देखते हुए इस फाइल को फिलहाल बंद कर दिया गया है।
वहीं, दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल के परिसर में भीड़ प्रबंधन और पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए चार 'सेल्फी पॉइंट' बनाने की योजना थी। अक्सर देखा जाता है कि मुख्य गुंबद के सामने पर्यटक फोटो खिंचवाने के लिए लंबी कतारें लगाते हैं, जिससे अव्यवस्था फैलती है। प्रशासन ने स्मारक के बाहर और कुछ खास कोणों पर सेल्फी स्टैंड लगाने का सुझाव दिया था। लेकिन एएसआई की आपत्ति के बाद इसे भी खारिज कर दिया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के कृत्रिम निर्माण से ताजमहल की ऐतिहासिक आभा और शांति भंग हो सकती है।
आगरा का पर्यटन क्षेत्र न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय (NRI) के लिए आगरा हमेशा से एक प्रमुख पर्यटन केंद्र रहा है। जब भी प्रवासी भारतीय भारत आते हैं, वे इन ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण अवश्य करते हैं। इस निर्णय का सीधा असर पर्यटकों के अनुभव पर पड़ेगा। हालांकि यह कदम आधुनिक सुविधाओं में कमी जैसा लग सकता है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टिकोण से यह प्राचीन वास्तुकला को उसी रूप में सुरक्षित रखने का प्रयास है जैसा वह सदियों पहले था।
स्थानीय पर्यटन उद्योग के कुछ वर्गों ने इस पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। कुछ का कहना है कि बुनियादी सुविधाओं और आधुनिक तकनीक का समावेश जरूरी है, जबकि इतिहासकार इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं। उनके अनुसार, 'यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज' साइट्स के साथ किसी भी तरह का नया निर्माण उनके वैश्विक दर्जे को प्रभावित कर सकता है। अब प्रशासन का ध्यान स्मारकों के आसपास प्रदूषण नियंत्रण और बेहतर परिवहन व्यवस्था पर केंद्रित है, ताकि पर्यटकों को बिना किसी आधुनिक निर्माण के भी सुगम अनुभव प्राप्त हो सके।
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