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राम मंदिर दान विवाद: सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई, चढ़ावे के कथित दुरुपयोग की जांच पर टिकी निगाहें

ICN24 Newsroom 13 जुल॰ 2026, 11:31 am
राम मंदिर दान विवाद: सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई, चढ़ावे के कथित दुरुपयोग की जांच पर टिकी निगाहें

अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे के कथित दुरुपयोग से जुड़ी याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। याचिकाओं में कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।

भारत के उच्चतम न्यायालय में आज अयोध्या स्थित भव्य राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान राशि के कथित दुरुपयोग से जुड़ी याचिकाओं पर एक महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। इन याचिकाओं में मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए एक स्वतंत्र और अदालत की निगरानी में जांच की मांग की गई है। देशभर के साथ-साथ विदेशों में रह रहे भारतीय समुदाय की निगाहें भी इस कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि राम मंदिर के लिए देश-विदेश से करोड़ों रुपये का दान प्राप्त हुआ है, लेकिन इसके प्रबंधन और व्यय में पारदर्शिता की कमी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि दान की गई राशि का उपयोग उन उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा रहा है जिसके लिए भक्तों ने योगदान दिया था। शीर्ष अदालत आज इन दलीलों की प्रारंभिक समीक्षा करेगी और यह तय करेगी कि क्या इस मामले में हस्तक्षेप की आवश्यकता है। राम मंदिर के निर्माण और उसके बाद वहां आने वाले चढ़ावे का मुद्दा न केवल धार्मिक है, बल्कि प्रशासनिक दृष्टि से भी अत्यंत संवेदनशील है। मंदिर का प्रबंधन 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' द्वारा किया जाता है, जिसे केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 2019 के ऐतिहासिक फैसले के बाद गठित किया था। अब उसी अदालत के सामने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर विशेष महत्व रखती है। जनवरी 2024 में हुए प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया था। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले हजारों हिंदू प्रवासियों ने न केवल इस उत्सव में भाग लिया था, बल्कि मंदिर निर्माण के लिए व्यक्तिगत रूप से दान भी दिया था। ऐसे में दान राशि के सही उपयोग को लेकर चल रहा यह कानूनी विवाद प्रवासी भारतीयों (NRIs) के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में बेहद संतुलित रुख अपना सकता है। यदि अदालत को लगता है कि वित्तीय अनियमितताओं के प्रथम दृष्टया साक्ष्य मौजूद हैं, तो वह ऑडिट रिपोर्ट मांग सकती है या किसी स्वतंत्र एजेंसी को जांच का निर्देश दे सकती है। हालांकि, ट्रस्ट की ओर से पहले भी कई बार कहा जा चुका है कि उनके पास हिसाब-किताब का पूरा रिकॉर्ड मौजूद है और वे किसी भी जांच के लिए तैयार हैं। आज की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति की पीठ याचिकाकर्ताओं के दावों को सुनेगी और संभवतः ट्रस्ट या केंद्र सरकार से जवाब तलब कर सकती है। इस फैसले का असर न केवल राम मंदिर के भविष्य के प्रबंधन पर पड़ेगा, बल्कि यह भारत के अन्य बड़े धार्मिक संस्थानों के वित्तीय पारदर्शिता के मानकों को भी प्रभावित कर सकता है।
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