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जेनोवा बायोफार्मा ने 139.5 करोड़ रुपये में बेचा अपना mRNA बिजनेस; डॉ. संजय सिंह की 'इम्यूनोस्क्रिप्ट' बनी नई मालिक

ICN24 Newsroom 13 जुल॰ 2026, 06:31 am
जेनोवा बायोफार्मा ने 139.5 करोड़ रुपये में बेचा अपना mRNA बिजनेस; डॉ. संजय सिंह की 'इम्यूनोस्क्रिप्ट' बनी नई मालिक

जेनोवा बायोफार्मास्युटिकल्स ने अपने एमआरएनए (mRNA) प्लेटफॉर्म को डॉ. संजय सिंह की नई कंपनी इम्यूनोस्क्रिप्ट लाइफ साइंस को 139.5 करोड़ रुपये में हस्तांतरित करने का निर्णय लिया है।

भारत की अग्रणी बायोटेक कंपनी जेनोवा बायोफार्मास्युटिकल्स, जो एमक्यूर फार्मास्युटिकल्स की सहायक इकाई है, ने अपने एमआरएनए (mRNA) प्रौद्योगिकी व्यवसाय को बेचने की घोषणा की है। इस सौदे के तहत, जेनोवा के एमआरएनए प्लेटफॉर्म और उससे संबंधित संपत्तियों को 'इम्यूनोस्क्रिप्ट लाइफ साइंस प्राइवेट लिमिटेड' को 139.5 करोड़ रुपये में हस्तांतरित किया जा रहा है। यह निर्णय भारतीय फार्मास्युटिकल क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर एमआरएनए तकनीक की मांग बढ़ रही है। इम्यूनोस्क्रिप्ट लाइफ साइंस एक नवनिर्मित कंपनी है, जिसके प्रमोटर डॉ. संजय सिंह हैं। डॉ. सिंह का नाम चिकित्सा जगत में किसी परिचय का मोहताज नहीं है; वे जेनोवा बायोफार्मास्युटिकल्स के पूर्व निदेशक रह चुके हैं और उन्हें भारत की पहली स्वदेशी एमआरएनए कोविड-19 वैक्सीन, 'GEMCOVAC-19' को विकसित करने का श्रेय दिया जाता है। उनकी विशेषज्ञता और नेतृत्व में इस तकनीक का भविष्य अब एक नई इकाई के तहत आकार लेगा। व्यावसायिक दृष्टिकोण से, जेनोवा ने इस बिक्री के माध्यम से अपनी मूल कंपनी एमक्यूर के पोर्टफोलियो को और अधिक सुव्यवस्थित करने का लक्ष्य रखा है। एमक्यूर ने नियामक फाइलिंग में स्पष्ट किया कि यह सौदा जेनोवा को अपनी मुख्य क्षमताओं पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति देगा, जबकि एमआरएनए तकनीक को एक स्वतंत्र और समर्पित इकाई के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। यह सौदा न केवल तकनीकी हस्तांतरण है, बल्कि इसमें बौद्धिक संपदा और विशिष्ट विनिर्माण क्षमताएं भी शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय और वैज्ञानिकों के लिए यह खबर विशेष रुचि की है। ऑस्ट्रेलिया वर्तमान में एमआरएनए विनिर्माण क्षेत्र में भारी निवेश कर रहा है, जिसमें विक्टोरिया में मॉडर्ना के साथ साझेदारी शामिल है। भारत में इस तकनीक के एक महत्वपूर्ण हिस्से का एक अनुभवी वैज्ञानिक के नेतृत्व वाली नई कंपनी में जाना, भविष्य में भारत-ऑस्ट्रेलिया बायोटेक सहयोग के नए द्वार खोल सकता है। ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र और भारत की विनिर्माण क्षमता के बीच तालमेल हमेशा से दोनों देशों के बीच चर्चा का विषय रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि एमआरएनए तकनीक केवल टीकों तक सीमित नहीं है। कैंसर उपचार, दुर्लभ बीमारियों और इम्यूनोथेरेपी में इसकी अपार संभावनाएं हैं। डॉ. संजय सिंह के नेतृत्व में इम्यूनोस्क्रिप्ट इन नए क्षेत्रों में शोध और विकास को गति दे सकती है। 139.5 करोड़ रुपये का यह निवेश यह भी दर्शाता है कि भारतीय निवेशक और उद्यमी अब उच्च-तकनीकी जैव-प्रौद्योगिकी संपत्तियों के मूल्य को पहचान रहे हैं। अंततः, यह ट्रांजैक्शन जेनोवा को अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करने में मदद करेगा, जबकि एमआरएनए तकनीक को एक विशेषज्ञ नेतृत्व मिलेगा जो इसे अगले चरण तक ले जाने में सक्षम है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इम्यूनोस्क्रिप्ट इस तकनीक का उपयोग किन नई चिकित्सा चुनौतियों का सामना करने के लिए करती है।
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