ऑस्ट्रेलिया
'मोनोकल्चर' बनाम बहुसंस्कृतिवाद: पॉलीन हैनसन की नई बयानबाजी और भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय पर इसका प्रभाव
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 07:36 am
पॉलीन हैनसन द्वारा ऑस्ट्रेलिया को एक 'मोनोकल्चर' के रूप में देखने की वकालत ने भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के बीच गहरी चिंता और नई बहस को जन्म दिया है।
ऑस्ट्रेलिया के राजनीतिक गलियारों में 'मोनोकल्चर' (एकल संस्कृति) शब्द ने एक नई बहस छेड़ दी है। वन नेशन पार्टी की नेता पॉलीन हैनसन द्वारा इस विचार को बढ़ावा देने के बाद, देश की सामाजिक पहचान को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यह मुद्दा विशेष रूप से भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है, जो वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया के सबसे तेजी से बढ़ते और सबसे सक्रिय प्रवासी समूहों में से एक है। हैनसन का तर्क है कि राष्ट्र की एकता के लिए एक साझा और एकल संस्कृति आवश्यक है, लेकिन आलोचकों का मानना है कि यह दृष्टिकोण आधुनिक ऑस्ट्रेलिया की वास्तविकता और इसकी विविधता को नजरअंदाज करता है।
पॉलीन हैनसन की राजनीति हमेशा से ही अल्पसंख्यकों और प्रवासियों को केंद्र में रखकर चलती रही है। हाल के घटनाक्रमों में उन्होंने अपने निशाने पर कुछ नए और चौंकाने वाले मुद्दे लिए हैं। सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, हैनसन अब केवल पारंपरिक आप्रवासन विरोधी रुख तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे एक ऐसे ऑस्ट्रेलिया की कल्पना कर रही हैं जहाँ सांस्कृतिक विविधता के बजाय एक 'मुख्यधारा' की संस्कृति का बोलबाला हो। उनके इस 'मोनोकल्चर' के विचार का सीधा अर्थ है कि प्रवासियों को अपनी मूल सांस्कृतिक पहचान छोड़कर पूरी तरह से एक पूर्व-निर्धारित ऑस्ट्रेलियाई सांचे में ढल जाना चाहिए।
भारतीय समुदाय के संदर्भ में, यह बहस काफी संवेदनशील है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले लाखों भारतीय न केवल यहाँ की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं, बल्कि अपनी भाषा, त्योहारों और परंपराओं के माध्यम से यहाँ के सामाजिक ताने-बाने को समृद्ध भी कर रहे हैं। हैनसन की 'मोनोकल्चर' की मांग इस सांस्कृतिक समृद्धि के लिए एक चुनौती की तरह देखी जा रही है। द गार्जियन के एक विश्लेषण के मुताबिक, वन नेशन पार्टी भले ही मुख्यधारा की राजनीति में अपनी अपील बढ़ाने की कोशिश कर रही है, लेकिन उसकी यह 'धुंधली दृष्टि' उसे राजनीतिक हाशिए पर ही रखती है। अधिकांश ऑस्ट्रेलियाई अब एक ऐसे समाज को स्वीकार कर चुके हैं जहाँ अलग-अलग संस्कृतियाँ एक साथ मिलकर राष्ट्र निर्माण करती हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हैनसन का सीनेट में बढ़ता प्रभाव और उनके कड़े तेवर आने वाले चुनावों में एक ध्रुवीकरण पैदा कर सकते हैं। 'द ऑस्ट्रेलियन' की रिपोर्ट के अनुसार, हैनसन ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने नियमों के अनुसार राजनीति करेंगी और व्यवस्था को चुनौती देंगी। हालांकि, आधुनिक ऑस्ट्रेलिया का ढांचा अब इतना बहुआयामी हो चुका है कि 'मोनोकल्चर' की ओर वापस लौटना लगभग असंभव है।
अंततः, यह बहस केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बारे में है कि ऑस्ट्रेलिया भविष्य में खुद को कैसे देखता है। क्या यह एक ऐसा देश बना रहेगा जहाँ दिवाली और होली को भी उतना ही सम्मान मिलता है जितना कि पारंपरिक ऑस्ट्रेलियाई त्योहारों को, या यह एक संकुचित सांस्कृतिक पहचान की ओर बढ़ेगा? भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह समय अपनी आवाज उठाने और बहुसंस्कृतिवाद के महत्व को रेखांकित करने का है, जो ऑस्ट्रेलिया की असली ताकत है।
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