ऑस्ट्रेलिया
जब ब्रिस्बेन की सड़कों पर भिड़ गए थे अमेरिकी और ऑस्ट्रेलियाई सैनिक: 1942 के उस दंगे की कहानी
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 10:24 pm
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिस्बेन में अमेरिकी और ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों के बीच हुए हिंसक टकराव की ऐतिहासिक दास्तां, जिसने शहर को हिला कर रख दिया था।
द्वितीय विश्व युद्ध का दौर ऑस्ट्रेलिया के इतिहास में एक ऐसा अध्याय है जिसने देश की सामाजिक संरचना को हमेशा के लिए बदल दिया। लेकिन 1942 के नवंबर महीने में क्वींसलैंड की राजधानी ब्रिस्बेन में जो हुआ, वह दुश्मन के हमले से नहीं बल्कि दोस्तों के बीच की आपसी कलह का नतीजा था। इसे इतिहास में 'बैटल ऑफ ब्रिस्बेन' (Battle of Brisbane) के नाम से जाना जाता है, जहाँ अमेरिकी और ऑस्ट्रेलियाई सैनिक आपस में ही भिड़ गए थे।
उस समय जनरल डगलस मैकआर्थर ने अपना मुख्यालय ब्रिस्बेन में स्थानांतरित कर दिया था। इसके साथ ही हजारों अमेरिकी सैनिक, जिन्हें 'यान्की' (Yanks) कहा जाता था, शहर में आ धमके। ब्रिस्बेन उस समय एक छोटा और शांत शहर था, जिसकी आबादी करीब 3,30,000 थी। अचानक आए हजारों विदेशी सैनिकों ने शहर का माहौल बदल दिया। ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों के बीच एक मुहावरा मशहूर हो गया था: "ओवरपेड, ओवरसेक्सड, एंड ओवर हियर" (ज्यादा वेतन पाने वाले, महिलाओं के प्रति आक्रामक और यहाँ मौजूद)।
तनाव की मुख्य वजह संसाधनों और सुविधाओं का अंतर था। अमेरिकी सैनिकों का वेतन ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों से कहीं अधिक था। उनके पास बेहतर वर्दी थी और वे अमेरिकी सेना के विशेष स्टोर (PX) से रेशमी जुराबें, चॉकलेट और सिगरेट जैसी चीजें खरीद सकते थे, जो उस समय राशनिंग के दौर से गुजर रहे ऑस्ट्रेलियाई लोगों के लिए विलासिता थी। इसके अलावा, स्थानीय महिलाओं के बीच अमेरिकी सैनिकों की लोकप्रियता ने ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों में ईर्ष्या और रोष पैदा कर दिया था।
26 नवंबर 1942 की शाम को यह तनाव हिंसा में बदल गया। घटना तब शुरू हुई जब एक अमेरिकी सैन्य पुलिसकर्मी (MP) ने नशे में धुत एक ऑस्ट्रेलियाई सैनिक के साथ सख्ती बरती। देखते ही देखते एडिलेड और क्रीक स्ट्रीट के कोने पर भीड़ जमा हो गई। गुस्साए ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों ने अमेरिकी सैनिकों और उनके ठिकानों पर हमला कर दिया। अगले दो दिनों तक ब्रिस्बेन की सड़कें युद्ध का मैदान बनी रहीं। इस हिंसा में एक ऑस्ट्रेलियाई सैनिक, गनर एडवर्ड वेबस्टर की गोली लगने से मौत हो गई और सैकड़ों लोग घायल हुए।
आज के आधुनिक और बहुसांस्कृतिक ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह घटना एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक सबक है। यह याद दिलाती है कि कैसे युद्ध के दबाव में अलग-अलग संस्कृतियों के बीच टकराव पैदा हो सकते हैं। उस समय भारतीय सेना के लाखों जवान भी मित्र राष्ट्रों की ओर से दुनिया के विभिन्न हिस्सों में लड़ रहे थे। ब्रिस्बेन का यह दंगा केवल दो देशों के सैनिकों की लड़ाई नहीं थी, बल्कि यह सामाजिक असमानता और युद्ध की थकान से उपजा एक विस्फोट था। आज जब हम ब्रिस्बेन को एक वैश्विक शहर के रूप में देखते हैं, तो यह इतिहास हमें बताता है कि शांति और सामाजिक सद्भाव कितनी मुश्किलों से हासिल किया गया है।
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