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'ग्रेट सॉकरूज़ सिकी': विश्व कप के रोमांच में डूबा ऑस्ट्रेलिया, दफ्तरों में सन्नाटा और पबों में उमड़ी भीड़

ICN24 Newsroom 24 जून 2026, 04:55 pm
'ग्रेट सॉकरूज़ सिकी': विश्व कप के रोमांच में डूबा ऑस्ट्रेलिया, दफ्तरों में सन्नाटा और पबों में उमड़ी भीड़

सॉकरूज़ के महत्वपूर्ण विश्व कप मैच के दौरान ऑस्ट्रेलिया में भारी संख्या में कर्मचारियों के छुट्टी लेने की संभावना है, जिसे 'ग्रेट सॉकरूज़ सिकी' कहा जा रहा है।

ऑस्ट्रेलिया में फुटबॉल का जुनून अपने चरम पर है। सॉकरूज़ (ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय फुटबॉल टीम) के आगामी विश्व कप मैच को लेकर पूरे देश में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि दशकों में पहली बार सॉकरूज़ का कोई महत्वपूर्ण मुकाबला ऑस्ट्रेलियाई कामकाजी घंटों के दौरान होने जा रहा है। इस स्थिति ने देश में 'ग्रेट सॉकरूज़ सिकी' (सामूहिक बीमारी का बहाना बनाकर छुट्टी लेना) की चर्चा छेड़ दी है, क्योंकि प्रशंसक अपने काम को छोड़कर टीवी स्क्रीन के सामने बैठने की तैयारी कर रहे हैं। इस माहौल ने पूर्व प्रधानमंत्री बॉब हॉक के उस प्रसिद्ध बयान की यादें ताजा कर दी हैं, जो उन्होंने चार दशक पहले दिया था। 1983 में अमेरिका कप में ऑस्ट्रेलिया की ऐतिहासिक जीत के बाद हॉक ने राष्ट्रीय टेलीविजन पर सफेद ब्लेज़र पहनकर घोषणा की थी, "कोई भी बॉस जो आज अपने कर्मचारी को काम पर न आने के लिए नौकरी से निकालता है, वह निकम्मा (bum) है।" हॉक के उन शब्दों को आज भी ऑस्ट्रेलियाई कार्य संस्कृति में खेल के प्रति दीवानगी के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे बड़े शहरों में पब और स्पोर्ट्स बार अभी से बुक हो चुके हैं। कई दफ्तरों ने तो आधिकारिक तौर पर अपने कर्मचारियों को कार्यालय में ही टीवी लगाने या लचीले घंटों में काम करने की अनुमति दे दी है। हालांकि, उत्पादकता के जानकारों का मानना है कि इस मैच के दौरान देश की आर्थिक गतिविधियों में एक अस्थायी गिरावट देखी जा सकती है, क्योंकि 'टूल डाउन' करने वालों की संख्या लाखों में होने की उम्मीद है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए भी यह एक नया और रोमांचक अनुभव है। पारंपरिक रूप से क्रिकेट प्रेमी माना जाने वाला यह समुदाय अब ऑस्ट्रेलियाई फुटबॉल के रंग में रंगा नजर आ रहा है। मेलबर्न के हैरिस पार्क से लेकर सिडनी के पैरामेटा तक, भारतीय मूल के प्रशंसक न केवल सॉकरूज़ का समर्थन कर रहे हैं, बल्कि इस खेल संस्कृति का हिस्सा भी बन रहे हैं। कई भारतीय प्रवासियों का कहना है कि यह माहौल उन्हें भारत में होने वाले क्रिकेट विश्व कप की याद दिलाता है, जहां खेल के लिए पूरा देश थम जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के आयोजन सामाजिक एकता को बढ़ावा देते हैं। ऑस्ट्रेलिया जैसे बहुसांस्कृतिक समाज में, जहां भारतीय समुदाय सबसे तेजी से बढ़ने वाले समूहों में से एक है, फुटबॉल एक जोड़ने वाली कड़ी के रूप में उभर रहा है। चाहे वह स्थानीय क्लब हों या राष्ट्रीय टीम, खेल के प्रति यह दीवानगी प्रवासी समुदायों को ऑस्ट्रेलियाई मुख्यधारा के साथ घुलने-मिलने का एक सुनहरा अवसर प्रदान करती है। फिलहाल, पूरे ऑस्ट्रेलिया की निगाहें स्क्रीन पर टिकी हैं, और काम की चिंता दूसरे पायदान पर खिसक गई है।
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