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क्या बच्चों के सामने माता-पिता का झगड़ना सही है? विशेषज्ञों ने दी मानसिक सेहत और विकास को लेकर चेतावनी
ICN24 Newsroom 10 जुल॰ 2026, 01:31 pm

बच्चों के सामने माता-पिता की बहस उनके मानसिक और भावनात्मक विकास पर गहरा असर डाल सकती है। ऑस्ट्रेलिया में प्रवासी भारतीय परिवारों के लिए विशेषज्ञों ने विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
किसी भी वैवाहिक जीवन में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन जब ये मतभेद बच्चों के सामने तीखी बहस या झगड़े का रूप ले लेते हैं, तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। हालिया मनोवैज्ञानिक शोध और विशेषज्ञों की राय के अनुसार, माता-पिता के बीच होने वाले झगड़े बच्चों के कोमल मस्तिष्क पर गहरा और स्थायी प्रभाव डालते हैं। यह मुद्दा विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय प्रवासी समुदायों के लिए महत्वपूर्ण है, जहाँ कई परिवार बिना किसी बड़े सामाजिक समर्थन (extended family support) के अकेले रह रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चे अपने माता-पिता को सुरक्षा और स्थिरता के प्राथमिक स्रोत के रूप में देखते हैं। जब वे अपने घर के सुरक्षित माहौल में ही तनाव और क्रोध देखते हैं, तो उनका सुरक्षा का भाव डगमगा जाता है। इससे बच्चों में चिंता (Anxiety), नींद की कमी और व्यवहार संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। लंबे समय तक ऐसे माहौल में रहने वाले बच्चों में आत्मविश्वास की कमी और सामाजिक मेलजोल में कठिनाई देखी गई है।
ऑस्ट्रेलिया में भारतीय परिवारों के संदर्भ में, प्रवास (migration) अपने साथ कई चुनौतियाँ लेकर आता है। काम का दबाव, वित्तीय तनाव और नए समाज में सामंजस्य बैठाने की कोशिशें अक्सर पति-पत्नी के बीच घर्षण का कारण बनती हैं। भारत में अक्सर संयुक्त परिवारों में दादा-दादी या अन्य रिश्तेदार बच्चों का ध्यान भटकाने या माहौल को शांत करने में मदद करते थे, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के न्यूक्लियर फैमिली सेटअप में बच्चे सीधे तौर पर माता-पिता के तनाव की चपेट में आ जाते हैं।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, इसका असर केवल मानसिक ही नहीं बल्कि शारीरिक विकास पर भी पड़ता है। अत्यधिक तनाव के कारण बच्चों के मस्तिष्क में कोर्टिसोल (Cortisol) नामक हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो उनके सीखने की क्षमता और याददाश्त को प्रभावित कर सकता है। स्कूल में खराब प्रदर्शन और आक्रामक व्यवहार भी इसी पारिवारिक कलह के संकेत हो सकते हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि सभी बहसें बुरी नहीं होतीं। यदि माता-पिता बच्चों के सामने किसी मुद्दे पर सम्मानजनक तरीके से चर्चा करते हैं और उसे सुलझाते हैं, तो इससे बच्चे 'कॉन्फ्लिक्ट रेजोल्यूशन' या विवाद सुलझाने का सकारात्मक तरीका सीखते हैं। लेकिन चिल्लाना, अपमानजनक भाषा का प्रयोग करना या शारीरिक हिंसा बच्चों के लिए मानसिक आघात (Trauma) जैसा होता है।
माता-पिता के लिए यह आवश्यक है कि वे अपने निजी विवादों को बच्चों की पहुंच से दूर सुलझाएं। यदि घर का माहौल तनावपूर्ण है, तो बच्चों से खुलकर बात करना और उन्हें यह समझाना जरूरी है कि झगड़ा उनकी वजह से नहीं हुआ है। ऑस्ट्रेलिया में कई 'पैरेंटिंग हेल्पलाइन्स' और परामर्श सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनकी मदद ली जा सकती है। अंततः, एक खुशहाल और शांत घर ही बच्चे के सर्वांगीण विकास की पहली शर्त है।
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