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राजा रघुवंशी हत्याकांड: सोनम ने सुप्रीम कोर्ट में खुद को बताया निर्दोष, कहा- 'मुझे झूठा फंसाया गया'
ICN24 Newsroom 10 जुल॰ 2026, 09:31 am

राजा रघुवंशी हत्याकांड की आरोपी सोनम ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर खुद को निर्दोष बताया है और मुकदमे में हो रही देरी का हवाला दिया है।
भारतीय कानूनी जगत के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक नया मोड़ आया है। मामले की मुख्य आरोपियों में से एक, सोनम ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष अपनी बेगुनाही का दावा किया है। एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अभय सिंह के माध्यम से दायर किए गए अपने जवाब में, सोनम ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उसे इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है और उसका इस अपराध से कोई लेना-देना नहीं है।
सोनम द्वारा दायर हलफनामे में इस बात पर जोर दिया गया है कि वह जांच और न्यायिक प्रक्रिया में पूरी तरह से सहयोग कर रही है। बचाव पक्ष का तर्क है कि अभियोजन पक्ष द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं और उनका उद्देश्य केवल उसे प्रताड़ित करना है। इस कानूनी जवाब के माध्यम से सोनम ने अदालत को आश्वस्त करने की कोशिश की है कि वह मुकदमे में किसी भी प्रकार की देरी नहीं कर रही है, बल्कि वह चाहती है कि सच्चाई जल्द से जल्द सामने आए।
इस मामले में मुकदमे की धीमी गति को लेकर भी गंभीर चिंताएं जताई गई हैं। कानूनी दस्तावेजों के अनुसार, इस केस में कुल 90 गवाहों को सूचीबद्ध किया गया है। हालांकि, 28 अक्टूबर, 2024 से अब तक केवल चार गवाहों का ही परीक्षण (Examination) हो पाया है। सोनम के कानूनी दल ने अदालत का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है कि अभी भी 86 गवाहों की गवाही बाकी है। गवाहों की इस लंबी सूची और मौजूदा रफ्तार को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि मुकदमे को पूरा होने में अभी काफी लंबा समय लग सकता है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भारत में होने वाली ऐसी कानूनी प्रक्रियाएं और न्याय में देरी एक महत्वपूर्ण विषय रही हैं। प्रवासी भारतीयों के बीच अक्सर भारत की न्यायिक प्रणाली और लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों (Undertrials) को लेकर चर्चाएं होती रहती हैं। राजा रघुवंशी जैसे हाई-प्रोफाइल मामलों में जब मुकदमे की रफ्तार इतनी धीमी होती है, तो यह कानूनी सुधारों की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
सोनम के वकील अभय सिंह ने अदालत से अनुरोध किया है कि मामले की परिस्थितियों और मुकदमे की संभावित लंबी अवधि को ध्यान में रखते हुए उचित राहत प्रदान की जाए। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट इस जवाब की समीक्षा करेगा और यह देखा जाएगा कि क्या अदालत मुकदमे में तेजी लाने के लिए कोई विशेष निर्देश जारी करती है या आरोपी की दलीलों पर कोई अन्य फैसला लेती है। यह मामला न केवल कानूनी दृष्टिकोण से बल्कि सामाजिक न्याय की दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण हो गया है।
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